टूटी हुई हड्डी कैसे जुड़ती है

हमारे शरीर की हड्डियां बहुत ज्यादा मजबूत है, इन्हें स्टील से कंपैरिजन करना बिल्कुल भी बेईमानी नहीं है. तभी तो हमारे दैनिक जीवन में mostly स्ट्रेसेस और strain को हमारी bone सहन कर ले जाती है. बट कुछ सिचुएशन जब ऐसी आती है, जब bone एक्सट्रीम फोर्सेस को सहन नहीं कर पाता है, तो bone फ्रैक्चर हो जाता है और यह bone fracture जब होता है, तब हमारे बोन में यह कैपेसिटी है कि वह खुद को कुछ महीनों या कुछ दिनों के अंदर ऑटोमेटिकली ही हील कर सके।

देखिये bone healing या बोन रिपेयर का यह प्रोसेस 4 चरणों में होता है। जिसमें से पहला चरण होता है, hemotoma का इस प्रोसेस में क्या होता है। जो बोन टूटी हुई होती है, उन दो टूटी हुई बोन के बीच में ब्लड क्लॉट का फॉरमेशन होने लगता है।

और जैसे ही यह ब्लड क्लॉट हुआ बहुत सारे inflammatory mediators जैसे वाइट ब्लड सेल्स और कुछ प्रोटींस ऐसी चीजें इस blood clot में इंटर करने लगती हैं। इन टूटी हुई bones के पास अगर कोई इंफेक्शन हुआ हो या फिर जो dead cells हैं उनको यह वाइट ब्लड सेल्स खाने लगती हैं। और जैसे ही inflamatory mediators इन ब्लड क्लॉट्स वाले एरिया में आते हैं, तो वहां पर inflammation होने लगता है, यानी सूजन होने लगता है, हल्का सा दर्द महसूस होने लगता है। जलन जैसी चीजें महसूस होने लगता हैं।

Bone healing का दूसरा स्टेज होता है, सॉफ्ट कैलस का फॉर्मेशन होना, दूसरे स्टेज में दरअसल यह होता है कि बोन में जो ब्लड क्लोट का फॉरमेशन हुआ है, उसके ऊपर अब फाइब्रोब्लास्ट और chondrocytes एक कनेक्टिव टिशु का फॉरमेशन करने लगते हैं। जैसे कार्टिलेज का… एक बहुत ही मुलायम कनेक्टिव टिशु का फॉरमेशन।

यह जो कनेक्टिव टिशु का फॉर्मेशन हुआ है दो बूंद के बीच में, यह इन दो बूंद के बीच में एक ब्रिज का निर्माण कर देता है। एक्स्ट्रा सेल्यूलर मैट्रिक्स को रिलीज कर के, जिससे अब दो बूंद को आपस में जोड़ने का जो प्रोसेस है, वह अब शुरू हो जाता है। जैसे ही यह bridge का फॉर्मेशन हुआ, angiogenesis के थ्रू इस bone area में new ब्लड वेसल्स का फॉरमेशन होने लगता है। जो यहां पर दोबारा से ब्लड फ्लो को मेंटेन करना शुरू कर देते हैं।

जिसके बाद से बोन हीलिंग का तीसरा स्टेज चालू हो जाता है, जिसे कहते हैं hard callus formation, अब क्या होता है कि ब्लड वेसल्स यहां पर बोन के फॉर्मेशन में जो मेन सेल होती हैं, ओस्टियोब्लास्ट उन्हें इस एरिया पर डिलीवर करने लगती हैं। जिससे होता यह है कि इस soft callus पर यह ओस्टियोब्लास्ट कैल्शियम फास्फेट जैसे मिनरल्स को डिपाजिट करना शुरू कर देते हैं। जिससे यह soft callus mineralised होकर hard callus के फॉर्म में बदल जाता है। एक बार यह hard callus का फॉर्मेशन हो गया, दोबारा से उतनी ही मजबूत पूर्ण फॉर्म हो जाती है।

लेकिन हड्डी के दोबारा से निर्माण में प्रॉब्लम यह होती है, कि इस टूटे हुए हिस्से में थोड़ा extra mess इकट्ठा हो जाता है bone formation के कारण से.. जिसके कारण से ही बोन हीलिंग का चौथा स्टेज अब चालू होता है, जिसे कहते हैं रीमॉडलिंग….

देखें इसमें क्या होता है हमारे बोल के फॉरमेशन में एक बहुत ही इंपॉर्टेंट सेल होती है, जो कि ओस्टियोब्लास्ट की तरह ही इंपॉर्टेंट होती है, इसे कहते हैं ओस्टियोक्लास्ट… यह क्या करती है यह कंटीन्यूअसली बोन सेल्स को resorption करती रहती है। जिससे नए bone cells का निर्माण हो सके। यह जो एक्स्ट्राmess में इकट्ठा हुआ है, बोन हीलिंग प्रोसेस में, इसको यह ओस्टियोक्लास्ट resorption कर लेता है। जिससे दोबारा से bone अपने पुराने वाले शेप में आ जाता है। but एक scar का निशान हमेशा बना रहता है। उस bone पर जहां पर भी बोन फै्रक्चर हुआ रहता है।

फ़racture जैसे लोंग बोन का फैक्चर को heal करने के लिए सर्जरी के थ्रू rod भी इंसल्ट करवाना पड़ता ,है बोन हीलिंग को सपोर्ट करने के लिए…

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