त्वचा गोरी या काली कैसे हो जाती है

मुझे लगता है कि हर एक भारतीय के मन में यह प्रश्न तो जरूर है कि कुछ लोग गोरे क्यों होते हैं  और कुछ लोग काले क्यों होते हैं. क्योंकि भारतीय इस गर्म और हमेशा सूरज की रोशनी से नहाए हुए इस भारत में भी गोरा होना चाहते हैं. इसीलिए तो भारत के बाजार में लोगों को गोरा करने के लिए तरह-तरह की फ्रॉड की जाते हैं, क्रीम के नाम पर…

भारत के अधिकतम जनता, यह बिना जाने ही कि हमारी स्किन इतनी डार्कर क्यों है?? बस क्रीम खरीदने की होड़ में लगे हुए. पिछले वीडियो में मैं आपको यह बताया था कि हमारी स्किन 3 लेयर से मिलकर बनी हुई होती है. Epidermis, dermis और hypodermis. हमारे skin की जो सबसे ऊपर वाली लेयर होती है, एपिडर्मिस असल में वही  काली या गोरी skin लेयर होती है।

क्योंकि उसमें हमारे स्किन को प्रोटेक्ट करने के लिए uv rays से, एक सेल होती है, जो melanin के एक प्रोटीन को रिलीज करती है, उसे melanocyte कहते हैं। यही मेलानोसाइट जब मेलानिन रिलीज करता है, तो यही मेलेनिन हमारे स्किन के के outer लेयर के keratinocyte पर जाकर इकट्ठा हो जाता है, और हमारे skin को darker अपीरियंस देता है। चलिये ढंग से समझते हैं कि मेलानोसाइट हमारे स्किन को काला कैसे कर देती है और स्किन को बचाता कैसे हैं।

देखिए हमारी स्किन की जो सबसे ऊपर वाली लेयर होती है, उसे एपिडर्मिस कहते हैं, यह एपिडर्मिस भी 5 layer से मिलकर बनी हुई होती है, जो एपिडर्मिस की सबसे नीचे वाली लेयर होती है, stratum basale इसमें एक cell पाई जाती है, जिसे कहते हैं, मेलानोसाइट…. यह मेलानोसाइट में कई सारे प्रोजेक्शन रहते हैं, जो कि स्किन के सबसे ऊपर ही वाले लेयर पर भी जाकर खुलता है, मतलब यह melanocyte जो भी रिलीज करेगा, उस से निकला हुआ हर चीज skin के ऊपरी सतह पर भी जाकर पहुंच जाएगा।

देखिये होता क्या है कि जैसे ही हमारी स्किन सूरज की रोशनी में expose हुई सूरज की रोशनी में जो भी rays होती है, वह हमारे स्किन के जो आउटर लेयर होती है, उसमें मौजूद जो सेल है, keratinocyte उसके डीएनए को sunlight की यूवी रेज डैमेज कर सकती हैं। और डैमेज हो जाने के बाद हो सकता है कि हमें कैंसर ऐसी चीजें हो जाए। लेकिन शरीर का काम है कि वह अपने आपको बचाये, इसीलिए यह melanocyte क्या करते हैं, अपने सेल प्लाज्मा के अंदर से melanosomes नाम के एक substance को रिलीज करते हैं, जिनके अंदर मेलेनिन भरा रहता है।

देखिये क्या होता है कि यह जो मेलेनिन होता है, जो melanosomes के अंदर भरा रहता है, वह हमारे skin की सबसे बाहरी लेयर है, उसके सेल केराटीनोसाइट के ऊपर जाकर इकट्ठा हो जाते हैं। ताकि जब भी सनलाइट keratinocyte के necleus पर पड़े जिसमें डीएनए भी होता है, तुरंत ही यह melanin  इन यूवी रेज को absorb करके इन यूवी रेज को dissipate कर दे ताकि हमारा डीएनए डैमेज ना हो, अब देखिए होता क्या है…

Melanin भी ह्यूमन स्किन में दो प्रकार का होता है, एक वह जिन के anscestors पृथ्वी के उस जगह पर से आते हैं, जहां पर सनलाइट बहुत ज्यादा होती है। जहां के लोगों के अंदर eumelanin बहुत ज्यादा होता है, और दूसरा जहां के पूर्वज पृथ्वी के उस पार्ट से आते हैं, जहां पर सनलाइट बहुत ही कम होती है, जैसे नॉर्थ यूरोप या साइबेरिया वगैरा ऐसे लोगों के स्किन के अंदर pheomelanin होता है।

देखिये मेलानिन सबके अंदर होता है, और यह दोनों ही प्रकार का मेलेनिन सबके अंदर होता है। अंतर इतना है कि एक प्रकार के melanin की मात्रा ज्यादा हो सकती है और एक प्रकार की कम हो सकती है। और ऐसा भी नहीं है कि किसी गोरे व्यक्ति या काले व्यक्ति के अंदर मेलनोंसाइट की संख्या कम या ज्यादा होती है, सबके अंदर मेलानोसाइट की संख्या बराबर ही होती है। अंतर इतना होता है कि दोनों में की जो melanocyte की एक्टिविटी है कि किन क्षेत्र के लोगों के अंदर यह मेलानोसाइट ज्यादा से ज्यादा होगा, यह टोटल सनलाइट पर डिपेंड करता है।

उदाहरण के लिए जो गोरे लोग होते हैं जिनके ancestors हजारों हजारों साल तक ऐसी जगह पर है जहां सनलाइट बहुत कम होती है, उनका जेनेटिक्स इस तरीके से evolve हो चुका है कि उनके मेलानोसाइट में कुछ ऐसे एंजाइम प्रेजेंट ही नहीं होते हैं, जो लगातार melanin बनाते रहे। और उनकी स्किन डार्क हो जाए। वही इनके पूर्वज शुरू से ही ज्यादा सूरज की रोशनी वाले जगह पर रहे हैं, उनकी जेनेटिक्स ऐसी evolve हो गई है कि उन्हें सूरज से बचाना है, इसलिए उनकी जेनेटिक्स ज्यादा से ज्यादा मेलेनिन बनाती है। ज्यादा से ज्यादा उनमें यह मेलानोसाइट एक्टिव रहे।

Pheomelanin भी यूवी रेज से स्किन को बचाता है, लेकिन बहुत ही लाइट uv rays से, अगर आपके स्किन में है तो आपकी स्किन लाइटर अपीयर होगी।

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