पुरुष अंडकोष की संरचना कैसा होता है – scrotum anatomy

आपने कभी यह सोचा है कि पुरुष अंडकोष यानी स्क्रोटम हमारे शरीर के बाहर क्यों होता है। किस वजह से प्रकृति ने हमारे स्क्रोटम को हमारे शरीर के बाहर किया हुआ है। देखिये जब वैज्ञानिकों ने इस पर अध्ययन किया तो पाया कि हमारे स्क्रोटम में टेस्टकल्स को शरीर से 3 डिग्री कम तापमान की जरूरत होती है। जिसकी कारण से हमारे टेस्टकल सही से फंक्शन कर पाता है, और ये शुक्राणुओं को बना पाता है। इसीलिए पुरुषों को जरूरी है कि वह हमेशा अपने टेस्टिकल्स को अपने बाकी शरीर से दो या तीन डिग्री ठंडा ही रखें।

चलिए इधर-उधर की बातें किए हुए, आज यही जान लेते हैं कि हमारा जो अंडकोष होता है, जिसमें हमारे टेस्टिकल्स होते हैं, यानी वृषण वह बने कैसे हुए होते हैं, उनकी संरचना कैसी होती है।

देखिए जब हम अपने स्क्रोटम को बाहर से देखते हैं, तो हम पाते हैं कि हमारा scrotum डार्क ब्राउन रंग में, जिसके बीच में एक raphe होता है. जो कि हमारे टेस्टकल के कंपार्टमेंट को दाएं और बाएं भागों में बांट देता है. जिन कंपार्टमेंट के अंदर हमारे टेस्टिकल्स होता है, यानी हमारी वृषण होते हैं, अंडाकार में…

देखिए हमारा यह जो स्क्रोटम होता है, यह mainly 6 लेयर से मिलकर बना रहता है, जिनमें से 2 लेयर muscles की होती हैं और 4 लेयर कनेक्टिव टिशु की fascia की बनी हुई होती है। यह जो दो मसल लेयर होते हैं, इनका काम भी होता है कि ठंड के समय में या गर्मी के समय में हमारे टेस्टकल्स के तापमान को रेगुलेट करते हैं।

जैसे ठंड के समय में यह मसल्स हमारे स्क्रोटम को सिकोड़ के बॉडी के पास ले आते हैं, जिससे ठंड के मौसम में टेस्टकल्स के तापमान बहुत ज्यादा ना गिर जाए। और गर्मी के समय में यह हमारी testicles को ढीला छोड़ कर लटका देते हैं। जिससे ज्यादा से ज्यादा तापमान बाहर निकल कर हमारे टेस्टकल्स का तापमान बाकी शरीर से कम से कम 3 डिग्री तो कम ही रहे।

देखिये जैसे ही हम अपने स्क्रोटम के इन 6 layers को पार करके अपने अंडकोषों के अंदर की ओर जाते हैं, तब हम अपने टेस्टिकल्स को पाते हैं। लेकिन हम सीधे ही अपने टेस्टकल्स के स्किन के skin को नही पाते है। बल्कि हमारे टेस्टिकल्स के ऊपर भी कई सारे लेयस होती हैं, आईये जानते हैं उन सभी लेयर्स के बारे में….

देखिए जैसे ही हम अपने टेस्टिकल्स के अंदर जाते हैं, हम पाते हैं अपने टेस्टकल्स के ऊपर सी शेप में एक सिरस मेंब्रेन को जिसे कहते हैं tunica vaginalis, जिसकी 2 लेयर होती है पहली लेयर पैराइटल होती है, जो कि स्क्रोटम की वॉल से लगी रहती है, और दूसरी लेयर विसरल होती है, जो कि टेस्टिकल्स के वॉल से लगी रहती है। देखिये ट्यूनिका वेजाइनलिस की जो लेयर है, वह टेस्टकल्स को पीछे की ओर से अपने अंदर envelope नहीं किया रहता है।

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इस चित्र में ध्यान से देखिए, ट्यूनिका वेजाइनलिस के इन दो लेयर के बीच में एक फ्लूइड भरा रहता है, जो कि दोनों लेयर के बीच में मूवमेंट कराने में मदद करता है, और जब किसी व्यक्ति को हाइड्रोसील हो जाता है, तो इन layers के बीच में fluid बहुत ज्यादा भर जाता है।

जैसे ही उसके बाद हम इस लेयर को भी पार कर के अंदर की ओर जाएंगे, तब हम testicles के बाहरी लेयर को पा जाएंगे, जिसे ट्यूनिका अल्बूजीनिया कहते हैं। टेस्टिकल का यही लेयर testis को वाइटिस अपीयरेंस देता है।

उसके बाद जैसे ही अपने टेस्टिकल्स को काटकर देखेंगे यानी इसके हम अंदर जाएंगे, तो हम पाएंगे कि हमारा टेस्टकल्स कई सारे कंपार्टमेंट में बटा रहता है। जिसे lobules कहते हैं, और इसी lobules के अंदर ही बहुत ही पतले पतले tubules होते हैं।

इन पतले पतले tubules को seminiferous tubules कहते हैं और इन्हीं सेमिनिफरस ट्यूबल्स के अंदर ही हमारे स्पर्म प्रोड्यूस होते हैं। देखिए टेस्टिकल्स में लगभग 500 से 600 tubules होते हैं। और इन tubules के बीच में एक और cell पाई जाती है, जिसे leydig cell कहते हैं, और यह जो leydig cell होती है, इसका काम ये होता है, यह मर्दों के अंदर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण कराता है, जिसके कारण मर्दों के अंदर सेकेंडरी सेक्सुअल करैक्टेरिस्टिक्स डिवेलप होते हैं।

देखिये है जो tubules होते हैं आगे आकर टेस्टिस के इस portion पर आकर एक ट्यूब का नेटवर्क बना लेते हैं, जिसमें seminiferous tubules  पर बने स्पर्म आकर इकट्ठा हो जाते हैं। इसे rete testis कहते है।

दऐखिये sperm बनने की प्रक्रिया में कुछ दिनों के बाद rete testis में उपस्थित स्पर्म इन efferent tubules से होते हुए हमारे testis के ऊपर बने हमारे testis इसका एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग epididymis में आकर जुड़ जाते हैं। दekhiye एपीडिड्यमिस क्या होता है, यह एक ट्यूबलाइक स्ट्रक्चर होता है, जिसमें sperm आकर इकट्ठा हुए रहते हैं, जहां पर स्पर्म मोटाईल होना सीखते हैं मतलब जहां पर वह मूवमेंट करना सीखते हैं। और वहां यहीं पर आकर sperm mature भी होते हैं।इसी एपीडिड्यमिस से ही से लगा हुआ होता है।

एक पतला सा ट्यूबलाइट स्ट्रक्चर जो कि हमारे यूरिनरी ब्लैडर के ऊपर से होते हुए पीछे की ओर घूम जाता है। जैसा कि आप इस चित्र में देख रहे है। और इस ट्यूबलाइट पिक्चर को वास डिफरेंस का नाम दिया गया है।

देखिये यूरिनरी ब्लैडर के पीछे यह वास डिफरेंस एक पाउच लाइक स्ट्रक्चर से जाकर जुड़ जाता है। जिसे सेमिनल वेसिकल्स कहते हैं। यह सेमिनल वेसिकल्स इंटरकोर्स के दौरान हमारे स्पर्म को न्यूट्रिशन और एनर्जी प्रवाहित करने के लिए कुछ लिक्विड बनाता है। जिससे मिलकर ही हमारा semen बनता है।

इसी सेमिनल वेसिकल्स से एक ejaculatory duct बाहर निकलता है, और प्रोस्टेट से जाकर जुड़ जाता है, प्रोस्टेट भी हमारे मेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम का बहुत ही इंपॉर्टेंट भाग है यह भी कुछ ऐसे लिक्विड स्वीट बनाता है जो हमारे पवन को नरेश करता है और फिर प्रोस्टेट से ही एक दम निकलता है जो कि यूरिन और सीमेंट दोनों को ही अपने अंदर से पास करता है जिसे यूरेथ्रा कहते हैं और हमारे पिन इसके आगे मीटर से सीमेंट इजेकुलेट हो जाता है

देखिए हमारे टेस्टिकल्स के चारों ओर ब्लड की सप्लाई हो रहती है एक आर्टरी के थ्रू और उसी आर्टरी के चारों ओर चिपके रहते हैं पतले पतले रक्त शिराएं जिन्हें पैंपिनिफॉर्म प्रैक्टिस करते हैं इन्हीं ब्लड बीन से ही ब्लड टेस्ट कल से एब्डोमिनल कैविटी की तरह जाती हैं और यह करते क्या हैं कि यह आर्टरी और वीनस के बीच एक करंट का निर्माण करते हैं जिससे टेस्टिकल्स का तापमान शरीर के बाकी हिस्से थोड़ा कम ही रहे

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