हड्डी आपस में कैसे जुड़ी रहती हैं

क्या आपको पता है कि हमारी हड्डियां आपस में जुड़ी कैसी रहती है, यह बात तो आपको पता ही है कि हमारे शरीर में हड्डियों का आकार अलग अलग है, और इन्हीं आकार के आधार पर इन्हें अलग-अलग भागो में कैटिगराइज किया गया है। flat bones, long bones, short bones, irregular bones जैसे कैटेगरी में…. और जब यह डिफरेंट आकार के bones आपस में जुड़ेंगे तो जाहिर सी बात है एक बहुत ही कंपलेक्स संरचना का निर्माण तो होगा ही, इसीलिए आज हम एक बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट चीज अपने शरीर के बारे में bone joints के बारे में पढ़ने जा रहे हैं, तो चलिए शुरू करते हैं….

देखिये हमारे शरीर में बोन ज्वाइंट तीन प्रकार की होती है, पहला जो जॉइंट है वह है हमारे शरीर में firbous joint जिसे immovable joints भी कहते हैं। दूसरा होता है cartilaginous joint जिसे slightly movemable joint भी कहते है। और तीसरा है synovial joint जिसे freely joint कहते हैं।

देखिये पहले प्रकार की जो ज्वाइंट है, fibrous joint जिसे immovable joint भी कहते हैं। इस प्रकार के joint में होता यह है कि दो हड्डियां आपस में एक कनेक्टिव टिशु के थ्रू आपस में जुड़ती हैं। जिसे fibrous connective tissue कहते हैं। और इस प्रकार की हड्डियों की जो जोड़ होती है, इसमें कभी भी हड्डियां आपस में हिलती नहीं है, मतलब एक स्थिर ज्वाइंट आपस में बना रहता है, जिससे हमारे यह जो कपाल की हड्डियां है, यह आपस में एक कनेक्टिव टिशु के थ्रू जुड़ी रहती हैं, और इन कपाल की हड्डियों के बीच की जोड़ को सूचर कहते हैं। और इसके उदाहरण है पेल्विक बोन की ज्वाइंट ये hip joint…

दूसरे प्रकार का जॉइंट जोकि कार्टिलेजिनस जॉइंट होता है, जिसे स्लाइटली मूवेबल ज्वाइंट भी कहते हैं। इसमें जो दो एडजेसेंट हड्डियां आपस में जुड़ती है, वह कार्टिलेज की मदद से आपस में जुड़ती हैं। और चूंकि कार्टिलेज एक बहुत ही फ्लैक्सिबल टिशू होता है, इसीलिए यह adjustend bone आपस में थोड़ा सा move भी कर पाते हैं।

इन दोनों एडजेसेंट हड्डियों के बीच यह cartilage काम क्या करता है ? यह कार्टिलेज इन दोनों बोंस को एक कुशन प्रोवाइड कराता है। कार्टिलेजिनस ज्वाइंट के उदाहरण हैं हमारा इंटर्वर्टेब्रल डिस्क के बीच का जॉइंट, जिसके बीच में हमेशा एक कार्टिलेज रहता है, यह बात मैंने कई बार बताया है, और हमारा प्यूबिक सिंफिसिस…

अब हमारे bones के बीच में जो तीसरे प्रकार का जॉइंट होता है, वह होता है सायनोवियल ज्वाइंट, जैसा कि इसका नाम है सायनोवियल, इसमें दोनों हड्डियों के बीच में एक फ्लुएड होता है, जिसे सायनोवियल फ्लुएड कहते हैं, जो कि दोनों हड्डियों के बीच एक फ्री मूवमेंट को जन्म देता है।

द्वखिये ये सायनोवियल ज्वाइंट छह प्रकार का होता है, इन सभी छह प्रकार के सायनोवियल ज्वाइंट के बारे में थोड़ा बहुत जान लेते हैं।

पहला सायनोवियल ज्वाइंट है बॉल एंड सॉकेट जॉइंट, जिसमें होता है कि joint में दोनों bones में से एक bone का एंड spherical यानी बॉल लाइक होता है, और एक bone में socket like डिप्रेशन जैसी संरचना बनी हुई होती है, जोकि बोंस को allow करता है, आपस में फ्री movement करने के लिए, इसमें bones सबसे ज्यादा move हो पाता है, इसके उदाहरण हैं, हमारे कंधे के बीच हमारा humerous और स्कैपुला के बीच जॉइंट, जिसके वजह से हम अपने भुजाओं को 360 digree घुमा सकते हैं।

दूसरा सायनोवियल ज्वाइंट होता है, saddle joint इसमें जॉइंट का एक भाग यानी 1 bone का भाग कॉन्वेक्स शेप में होता है, तो दूसरे जॉइंट होने वाले बोन का shape concave होता है, जिसे अभी आप इस इमेज में देख सकते हैं, इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, हमारे thumb का जॉइंट और इस ज्वाइंट के बीच में भी सायनोवियल फ्लुएड भरा रहता है, किसके बीच कभी फ्रिक्शन ना हो।

तीसरे प्रकार का सहयोग जॉइंट है, pivot joint इसमें क्या होता है, अभी आप इमेज में जैसा आप दो जॉइंट का फॉर्मेशन देख रहे हैं, इसमें एक circular cylendrical shape का structure अपने ही parellel एक structure से जुड़ा हुआ है, एक डिप्रेशन में, जहां पर सिलैंडरिकल शेप वाला स्ट्रक्चर फ्रिली move कर सकता है, दाएं बाएं। इसी तरह हमारे सर्वाइकल में मौजूद एटलस और axis bone भी आपस में pivot joint बनाते हैं। जिसकी वजह से हैं हम अपने गर्दन को दाएं बाएं हिला सकते हैं, बिल्कुल इस तरीके से…

चौथे प्रकार का synovial joint है, hinge joint इसमें हम अपने बोन को केवल एक ही डायरेक्शन में move कर सकते हैं। मतलब एक ही प्लेन में move कर सकते हैं। इसके उदाहरण हैं हमारी कोहनी के बीच जो जॉइंट है और हमारे घुटनों के बीच जो जॉइंट है, इसमें हम अपने घुटनों को केवल पीछे की ओर मोड़ सकते हैं, और अपने कोहनी को केवल आगे की ओर मुड़ सकते हैं। इसमें जॉइंट कैसे होता है, जिसमें जॉइंट ठीक वैसे ही होता है जैसे हमारे दरवाजों में कब्ज़े होते हैं, ठीक वैसे ही इसमें भी जॉइंट होता है। बस अंतर इतना है कि इस ज्वाइंट में दोनों हड्डियों के ऊपर hyaline cartilage की एक लेयर होती है, और बीच में इनके सायनोवियल फ्लुएड भरा रहता है।

पांचवी प्रकार का जॉइंट है Condyloid joints देखिये condyle का मतलब egg होता है। इसमें यह होता है कि इसमें एक egg shape की bone अपने एक elliptical shape की डिप्रेशन में फिट होकर, दाएं बाएं आगे पीछे move तो कर सकता है, पर वह रोटेट नहीं कर सकता है। इस प्रकार की जॉइंट का सबसे अच्छा उदाहरण है, हमारी उंगलियों के बीच की जॉइंट हम उसे दाएं बाएं move कर सकते हैं, आगे पीछे कर सकते हैं, पर रोटेट नहीं कर सकते।

छठे प्रकार का जॉइंट है, प्लेन जॉइंट जिसमें क्या होता है कि इसमें जॉइंट होने वाली दो हड्डियां आपस में स्लाइड करती हैं, और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है हमारे हथेली की हड्डियां, जिसमें बहुत सारी छोटी-छोटी हड्डियां होती हैं, लेकिन वह हमारे ulna और रेडियस पर आसानी से स्लाइड हो जाती हैं।

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