बच्चों के रोने के कारण जो आपको उसे चुप कराने में करेंगे मदद

बच्चे कुछ बोल तो सकते नही (Baccho ke rone ka karan) और ऐसे में वे क्यों रो रहे हैं यह अक्सर नए बने माता-पिता को बहुत ही परेशान कर देता है। यदि हमे बच्चों के रोने का कारण ही पता ना हो तो ऐसे में हम उन्हें चुप कैसे ही कराएँगे। इसलिए आपका यह जानना (Bacchon ke rone ka karan) बहुत जरुरी हैं कि आपका
बच्चा रो किसलिये रहा हैं या उसे क्या तकलीफ हैं।
इस लेख में आपको बच्चो के रोने के कई कारण (Bache kyu rote hain) मिलेंगे जिनका जानना आपके लिए बहुत जरुरी हैं ताकि आप अपने बच्चे को बेहतर तरीके से जान सके या उन्हें समझ सके। इसलिए चलिए जानते हैं बच्चों के रोने के कारण।

बच्चों के रोने के कारण (Baccho ke rone ka karan)

1. भूख लगना

अब बच्चे का पेट छोटा सा तो होता ही हैं जो एक बार पेशाब कर देने या पॉटी जा आने के बाद एक मिनट में ही खाली भी हो जाता हैं। अब बच्चा खाता थोड़ा सा ही हैं और जब वह सुसु या पॉटी कर देता हैं तो उसका पेट उसी समय खाली हो जाता हैं। पेट खाली हो जाने के कारण बच्चा रोने लगता हैं और यही उसके रोने का प्रमुख कारण
होता हैं।
इसलिए आप समय-समय पर अपने बच्चे को कुछ ना कुछ खाने को देते रहे। जैसे कि माँ का दूध या गाय का दूध दे दिया, या फिर दूध में सूजी उबाल कर दे दी या फिर दाल का पानी या किसी फल का रस इत्यादि। इससे आपके बच्चे का पेट भरा रहेगा और वह रोयेगा भी नही।

2. नींद नही आना

बच्चों के रोने का दूसरा सबसे प्रमुख कारण हैं उसे नींद नही आना या नींद आने में परेशानी होना। हम अक्सर बच्चों के रोने पर उसे सबसे पहले खाना देते हैं लेकिन यदि वह तब भी ना चुप हो तो अवश्य ही उसे नींद आ रही हैं और वह सोने के लिए ही रो रहा हैं।


ऐसे में आप उसे थपकी देकर या झुला देकर सुलाने की कोशिश करे। इसके लिए आप लोरी भी सुना सकते हैं या कोई मध्यम आवाज का संगीत भी उसे सुना सकते हैं। कमरे में रोशनी भी कम कर दे और धीमी रोशनी का बल्ब जगाये ताकि उसे आरामदायक नींद आ सके।

3. थकान

दिनभर बच्चे खेलते रहते हैं या कोई ना कोई उसे कुछ ना कुछ खिला रहा होता हैं और उसे इधर से उधर लेकर घूम रहा होता हैं। इतना ही नही, बच्चा अपने आप भी अपने हाथ पैर हिला हिलाकर थक जाता हैं और इस कारण वह रोने लग जाता हैं।

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यदि आपके बच्चे को थकान हो रही हैं तो आप उसे एक कपड़े में लपेट ले ताकि वह ज्यादा हाथ पैर ना हिला सके और उसे सुलाने का प्रयास करे। आप चाहे तो उसे कपड़े में लपेट कर अपने सीने से भी लगा सकते हैं और उसे लेकर इधर उधर घूम सकते हैं।

4. डर जाना

वो कहते हैं ना कि जब तक बच्चा बोलना नही सीखता या बड़ा नही हो जाता तब तक उसके दिमाग में पिछले जन्म की यादे बनी रहती हैं। ऐसे में वह उन यादो को याद कर कभी हंसने लगता हैं तो कभी रोने। यदि कारण हैं कि जब बच्चे को अपने पिछले जन्म की कोई बुरी बात याद आती है तो वह उसे याद कर जोर जोर से रोने लग जाता हैं।


ऐसे में उसे आपके सहारे की आवश्यकता होती हैं जो आपको उसी समय देना चाहिए। इसके लिए उसके पास लेटे या फिर उसे अपने सीने से लगाए। ऐसे में उसकी माँ बहुत मदद कर सकती हैं क्योंकि माँ का स्पर्श बच्चे को जल्दी चुप कराने में सहायक होता हैं।

5. बुरे सपने आना

जब बच्चे सो रहे होते हैं और नींद में अचानक से जागकर उठ जाते हैं और जोर जोर से रोना शुरू कर देते हैं। इसका अर्थ हुआ कि उसने अवश्य ही कोई बुरा सपना देखा हैं। जैसे आपको या हमको बुरे या अच्छे सपने आते हैं वैसे ही बच्चे को भी आते हैं।

इसलिए यदि बच्चा नींद में से जागकर रोने लगे तो अवश्य ही उसे कोई बुरा सपना आया होगा। ऐसे में उसे उठाकर इधर उधर की चीज़े दिखाए और उसका मन बहलाने की कोशिश करे। ऐसा करने से वह जल्द ही चुप हो जाएगा।

6. तेज आवाज़

बच्चों को तेज आवाज़ या एकदम से हुई तेज आवाज़ से डर लगता हैं और वे इसे सुनकर इस क़द्र तक डर जाते हैं कि जोर जोर से रोना शुरू कर देते हैं और फिर उन्हें चुप कराना मुश्किल हो जाता हैं। जैसे कि कोई बड़ा बर्तन गिर जाना, या एकदम से तेज बोलना या कुछ और।
इसलिए आगे से इस बात का ध्यान रखे कि जहाँ आपका बच्चा लेटा हुआ हैं या सो रहा हैं वहां तेज आवाज़ में बिल्कुल भी बात ना करें और अन्य चीजों का भी ध्यान रखे ताकि वह एकदम से डरे नही।

7. गैस बनना

बच्चों के पेट में गैस बन जाना बहुत ही आम बात हैं। इसे आज की भाषा में कोलिक भी कहा जा सकता हैं। यदि आपके बच्चे के पेट में गैस बनी हुई हैं तो उसका पेट टाइट हो जाएगा जिसे आप छू कर पता लगा सकते हैं। ऐसे में ना तो आपका बच्चा कुछ खायेगा और साथ ही रोता रहेगा वो अलग।
इसके लिए आप डॉक्टर से पूछकर गैस की कोई दवाई ले सकते हैं या उसे जन्म गुट्टी पिला सकते हैं। इससे पेट की गैस से आराम मिलता हैं और बच्चा हवा पास कर देता हैं। बच्चों का हवा पास करना बहुत आम बात हैं और इससे उसका पेट साफ रहता हैं।

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