क्यों हमे बहुत ज़्यादा न्यूज़ नहीं देखना चाहिए

आप मुझे एक बात बताइए 2020 में अगर आपने कुछ 10,000 नहीं सुनी है, तो उन 10,000 न्यूज़ में से आप मुझे कोई एक न्यूज़ बताइए जिसको सुनकर आप अपने जीवन में कुछ प्रोडक्टिव कर पाए हो. आपके बिजनेस के लिए कोई फायदा हुआ हो. आपके जीवन के कुछ समस्याओं का समाधान हो गया हो या उस news को जानकर आपकी बौद्धिक स्तर में इजाफा हुआ हो कोई एक चीज बताइए…

अगर आप ध्यान दिए हो, कहने का मतलब है कि अगर आप अपने आसपास के सराउंडिंग की चीजों को ऑब्जर्व करते हो तो आप देखे होंगे कि जितने भी उम्र में बड़े लोग होंगे जैसे 50 साल या 60 साल की उम्र वाले लोग उन्हें न्यूज़ देखने का शौक कुछ ज्यादा ही रहता है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह केवल एक खास उम्र के लोगों तक ही सीमित है पर अधिकतम आप अधेड़ उम्र वालों को न्यूज़ देखने के लिए ज्यादा उतावला पाते होंगे. उन्हें दुनिया कि वह सभी न्यूज़ जाननी है जो उनके जीवन में भले ही काम की ना हो या भले ही उन्हें उसके बारे में कोई भी जानकारी ना हो। लेकिन उन्हें जानना सब है।
मानो पूरी दुनिया की जिम्मेदारी उन्हीं लोगों के कंधे पर है, तो जब आप उन्हें ऑब्जर्व करते हो जब आप उनके बौद्धिक स्तर को observe करते हो तो क्या आपको लगता है कि वह  बुद्धिमान लोग हैं। क्या वह आपके जीवन को अच्छा बना सकेगे वह बड़े लोग आपके जीवन का मार्गदर्शन कर सकेंगे।

जैसा कि आप जानते हैं कि जब तक कोई न्यूज़, किसी भी खबर को चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों ना हो न्यूज़ वाले उसकी सनसनी ना बनाकर आपके सामने प्रस्तुत करें तब तक आपके मन में उस विषय को लेकर कभी डर नहीं बना रहता है। और जैसे ही आपके दिमाग में किसी चीज को लेकर डर बन जाए आप को कंट्रोल करना बहुत ही ज्यादा आसान हो जाता है और यही तो कर रहे हैं, आजकल के पॉलीटिशियन।

बस करना क्या है न्यूज़ चैनल के जरिए ऐसी सनसनी फैलानी है जिसके जरिए बस आपके मन में डर बैठ जाए और डर कर आप बिल्कुल कुछ चंद लोगों के जो यह सनसनी फैला रहे हैं उनके गुलाम बन जाओ।

लेकिन आपको ऐसा नहीं करना है आज मैं आपको बताऊंगा कुछ ऐसे पॉइंट जिनको जानकर आप कभी भी न्यूज़ चैनल को फॉलो नहीं करोगे और यकीन मानो जब आप न्यूज़ चैनल या किसी भी तरीके की main stream मीडिया से काफी हद तक काट जाओगे मेरे कहने का मतलब है कि केवल काम की चीजों को जानोगे तो आपके दिमाग में, आपके जीवन में कितना ज्यादा परिवर्तन आएगा या आप सोच भी नहीं सकते हो। तो बिना समय गवाएं जानते हैं कि आखिर हमें न्यूज़ क्यों नहीं देखनी चाहिए।

1. न्यूज़ आपके अंदर stress को जन्म देता है –

यह कोई नई बात नहीं है यह बात तो सभी जानते हैं कि न्यूज़ चैनल किसी चीज को इतना हाइपर करके दिखाते हैं कि व्यक्ति खासतौर से साधारण व्यक्ति चीजों को देखकर इतना डर जाते हैं और उन्हें इतना stress हो जाता है कि वह यह बात भूल ही जाते हैं कि समाज से संबंधित जिस न्यूज़ को वह देख रहे हैं उस समाज में जाकर उन्होंने कभी उस चीज का अनुभव किया ही नहीं है।
बस दूसरों ने आपको बताया खासतौर से न्यूज़ चैनल वालों ने और आप इस बात की टेंशन लेकर बैठ गए। जबकि साइकोलॉजी कहती है कि जब भी आपको किसी चीज के बारे में जानना होता है तो सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप जाकर उस माहौल में उन चीजों को स्वयं अनुभव कीजिए ना कि दूसरों के बताए हुए बातों को मान लेना चाहिए। बिना यह जाने कि वह सच है या झूठ और एक बार आपको stress हो गया आपके शरीर में ऐसे हार्मोन बनने लगेंगे जो आपको हमेशा अलर्ट पर रखने लगेंगे जिसके कारण से आपकी शरीर में कभी भी ग्रोथ नहीं होगा आपके मसल्स और बाकी के cells रिपेयर नहीं हो पाएंगे और इससे आपकी इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाएगी।

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2. न्यूज़ आपको काल्पनिक दुनिया मे ले जाता है –

आप को यह बात पता होना चाहिए ब्रेन को जब भी कोई इंफॉर्मेशन मिलती है तो ब्रेन उस इंफॉर्मेशन को प्रोसेस करके उन इंफॉर्मेशन की मैपिंग करने लगता है। और उस इंफॉर्मेशन के रिकॉल करने पर आप चीजों को सोच पाते हो और चीजों को याद कर पाते हो। जैसे जब भी आप किसी के चेहरे को देखते हो तो randomly ब्रेन सपने में कभी आपको उस व्यक्ति के चेहरे को दिखा सकता है। आप सपने में कोई भी फेस खुद से नही बना सकते। उसी तरह जब आप किसी न्यूज़ को सुनते हो तो ब्रेन इंफॉर्मेशन को प्रोसेस करके एक एक झूठी कल्पना की दुनिया या कह सकते हो फेंटेसी की दुनिया में भी आप को ले जाता है इसलिए अपने ब्रेन को कभी भी गलत इंफॉर्मेशन मत दो.

3. न्यूज़ आपके दिमाग में कचरा भर देता है –

देखें जब भी कोई बातें हम सुनते हैं तो ब्रेन उन बातों को यानी उन इंफॉर्मेशन को प्रोसेस करता है जब ब्रेन को वह बातें कुछ खास नहीं लगती हैं यानी जो बातें जानकर ब्रेन को यह नहीं लगता है कि यह हमारे survival के लिए उतनी इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन है तो ब्रेन उस इंफॉर्मेशन को भुला देता है. तो ध्यान दीजिए न्यूज़ चैनल में आप न जाने कितनी ही ऐसी फालतू की बातें सुनती हैं जो आपके काम की होती ही नहीं है और जो बातें आपके काम के नहीं होती है ब्रेन उसे भुला देना ही ज्यादा इंपॉर्टेंट समझता है. और केवल उन्हीं बातों को ज्यादा महत्व देता है जिस पर आप ज्यादा फोकस करते हो तो फालतू की बातें मत सुनिया कीजिए.

4. सर्कल ऑफ इनफ्लुएंस –

एक term है circle of influence और circle of concern जानते हैं इसका मतलब क्या है… देखिए जैसे मान लीजिए आपको बहुत ज्यादा चिंता है इस बात की कि दुनिया में क्लाइमेट चेंज हो रहा है कोरोनावायरस दुनिया भर में फैल रहा है मतलब आपको दुनिया भर के कई प्रकार के चीज़ों की चिंता है यह आप का सर्किल ऑफ concern है जो कि पूरे पृथ्वी भर में फैला हुआ है।
लेकिन आप इससे संबंधित इन चीजों को सुधारने के लिए क्या कर सकते हो, आप climate change के लिए ज्यादा से ज्यादा कुछ पौधे लगा देंगे, फैक्ट्रियों को बंद करवा देंगे अपने प्रयास से या फिर समाज में जो भी गंदगी या हैं जो एनवायरनमेंट को नुकसान पहुंचा रहे हैं उनको एक हद तक रोक सकते हैं। लेकिन आप पूरी तरीके से इस चीज को सुधार नहीं सकते हैं। यह आपका circle of influence है मतलब आप इससे संबंधित यानी climate change से संबधित जो कर सकते हैं यह आपका circle of influence.

अब न्यूज़ क्या करता है न्यूज़ आपको दुनिया भर की इतनी बड़ी बड़ी बातें दिखा देता है जिससे आपका कोई मतलब भी नहीं है और आप उससे संबंधित चीजों पर अपना influence भी नहीं दिखा सकते हैं। मानसिक रूप से ही और ना ही शारीरिक रूप से ही तो जब आपके दिमाग में कचरा भरेगा तो आप कभी भी प्रोडक्टिव काम कर ही नहीं पाओगे। आप हमेशा अपने सर्कल ऑफ इनफ्लुएंस से ज्यादा करने का प्रयास करोगे जो आप कभी कर ही नहीं पाओगे तो बेहतर है कि न्यूज़ लिमिटेड देखिए।न्यूज़ आपके सोचने समझने की शक्ति को कम कर देता है –
आप जितनी नई नई चीजों को देखोगे और जितने नए नए लोगों से मिलोगे जितनी नई-नई परिस्थितियों का आप फेस करोगे आप उतने ही ज्यादा बुद्धिमान बनोगे आपकी कॉग्निटिव और इंटेलिजेंस में वृद्धि होगी। लेकिन जब आप किसी जगह पर जाओगे ही नहीं क्योंकि न्यूज़ देखकर आप डर गए हो कि वहां पर तो घनघोर नक्सली है वहां पर तो आतंकवादी रहते हैं वहां के लोग ऐसे होते हैं जैसे नेगेटिव चीज है जो कि अधिकतम न्यूज़ ही फैलाती है।
यह देख कर आप डर के मारे कहीं जाओगे ही नहीं तो आपका ब्रेन उस लेवल पर पहुंच ही नहीं पाएगा क्योंकि आप नई चीजों को जान ही नहीं पाओगे उदाहरण के लिए ले लीजिए न्यूज़ चैनल पर दिल्ली और यूपी जैसे जगहों के बारे में इतनी नेगेटिव बातें फैलाई जाती हैं जैसे मानो कि दुनिया भर का सारा क्राइम बस यहीं पर होता है अगर डर के मारे आप जाओगे ही नहीं तो आपको कभी पता ही नहीं चलेगा कि यहां के लोग होते कैसे हैं। क्या सच में जैसी चीजें न्यूज़ में दिखाई जा रही हैं चीजें वैसी ही हैं, तो न्यूज़ misलीडिंग होता है इन मोस्ट केसेस

6. न्यूज़ आपकी क्रिएटिविटी को खत्म कर देता है –

एक रिसर्च बताती है जिन चीजों के बारे में हम पहले से जानते हैं उन चीजों से संबंधित हमारे ब्रेन में क्रिएटिविटी बहुत कम हो जाती है यही कारण है कि पहले के जमाने के लोग यंग एज में चीजों को बहुत कम जानते थे जिसके कारण से वह चीजों के साथ नई-नई एक्सपेरिमेंट करके अपनी क्रिएटिविटी को बढ़ा पाते थे और न्यूज़ तो आपको दुनिया भर के बारे में जानकारी ऐसे दे देता है जैसे मानो कि उसको जानकर आप कितना ज्यादा बुद्धिमान हो जाओगे।

7. न्यूज़ आपको निष्पक्षता से दूर ले जाता है –

देखिए आज कल की न्यूज़ चैनल को तो आप देख ही रहे हैं खासतौर से भारत की न्यूज़ चैनल को, न्यूज़ चैनल में सीधे-सीधे किसी एक पक्ष का बिल्कुल बेशर्मी से पक्ष लिया जाता है यह भी नहीं कि सामने वाला देखकर आपके बारे में क्या सोच रहा है, आप इतना ज्यादा बायस हो गए हो है और जब आप भी बिल्कुल रोबोट की तरह इन न्यूज़ चैनल को देखते हो तो आप भी बिल्कुल हिप्नोटाइज होकर उन न्यूज़ एंकर की बात में आ जाते हो और आपको उन्हीं की बातें सच लगने लगती हैं आप यह बात सोच ही नहीं पाते कि सामने वाले का भी कोई पक्ष है सामने वाले व्यक्ति भी कोई बातें होंगी जिस को जाने बिना हमें निर्णय नहीं लेना।

और भाई जब यह सब चीजें आपके दिमाग में आ जाएंगे ना जितनी भी बुराइयां है वह सब तो आपका ब्रेन कभी भी डिवेलप नहीं हो पाएगा बिल्कुल छोटी सी बुद्धि हो जाएगा आपका और जिसमें केवल और केवल कचरा भरा रहेगा जो कभी भी कठिन परिस्थितियों को फेस नहीं कर सकता और ना ही कोई bold action ले सकता है तो अपने ब्रेन को बिल्कुल भी छोटा मत कीजिए और हमेशा रियलिटी में जिए और चीजों को रियल्टी में अनुभव कीजिए ना की न्यूज़ देख कर अपना समय बर्बाद कीजिए

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