पक्षी कितना ऊंचा उड़ सकते है

क्या आपको पता है बायोस्फीयर क्या होता है?? पृथ्वी पर बायोस्फीयर वह क्षेत्र होता है जहां पर जीवन पनपता है या कहिए जहां पर जीवन संभव है. हिंदी में इस को जैव मंडल कहते हैं।

अब जैसे उदाहरण के लिए देखिए पृथ्वी के सतह से 50 किलोमीटर ऊपर तक कुछ छोटे-छोटे माइक्रोब्स जिंदा रह सकते हैं और क्या आप जानते हैं कि जब आप पृथ्वी के सतह से 50 किलोमीटर के ऊपर तक पहुंच जाओगे तो आपको यह नीला आसमान भी बिल्कुल फेडेड होते हुए ब्लैकनेस के साथ दिखने लगेगा।

क्योंकि ऊपर जाते जाते धीरे-धीरे पृथ्वी का वायुमंडल खत्म हो जाएगा और 100 किलोमीटर ऊपर पहुंचने पर तो पूरा अंतरिक्ष ही दिखने लगेगा।

इसी तरह पृथ्वी की सतह से जब हम जमीन के नीचे की तरफ बढ़ेंगे, तब तब एक अनुमान के मुताबिक पृथ्वी की सतह से 4 किलोमीटर के नीचे भी कुछ माइक्रोब्स और डेविल वर्म जैसे जीव जीवित रहते हैं और समुद्र की सतह के नीचे तो अभी हाल ही में वैज्ञानिको ने जीवन के सबूत पाए हैं वहाँ भी एक से डेढ़ किलो मीटर नीचे कुछ माइक्रोब्स जीवित रह सकते है.

और पृथ्वी की सतह पर तो हम सब मनुष्य जीव सब तो रहते हैं यानी पृथ्वी का बायोस्फीयर काफी बड़ा है. पर यह पूरे पृथ्वी को नहीं घेरे हुआ है. अब एक बात बताइए अभी मैंने आपको बताया कि जमीन से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी कुछ छोटे-छोटे माइक्रोब्स जीवित रह सकते हैं और रहते भी हैं. मतलब इतनी ऊंचाई पर जीवन जीने के कुछ अनुकूलतम वातावरण मौजूद है. तो क्या एक पक्षी भी जमीन से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर जीवित रह सकता है.

आज हम यही जानने का प्रयास करेंगे और यह भी जानेंगे कि कौन सा पक्षी है जो जमीन से सबसे ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकता है आसानी से सरवाइव करके।

सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी –

इस दुनिया में सबसे ऊंचाई पर उड़ने वाला जो पक्षी अब तक जो पाया गया है वह रिकॉर्ड किया गया 1973 में अफ्रीका में पाया जाने वाला एक गिद्ध जो की जमीन से 11.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था और अचानक से एक हवाई जहाज के इंजन में फस जाने की वजह से मर गया.

Rüppell's vulture
Rüppell’s vulture

इसके बाद से अब तक ऐसे किसी भी पक्षी को स्पॉट नही किया गया हैं जो इतना ऊंचा उड़ता हो। पर क्या पक्षी जाति सच में केवल 11.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर ही उड़ पाते हैं क्या इससे ज्यादा ऊंचाई पर वह नहीं उड़ पाएंगे?

भारत में आने वाले हंस कुछ खास –

अगर आपने ध्यान दिया हो तो आप देखते होंगे कि जाड़ों के समय में एक प्रकार का हंस भारतीय उपमहाद्वीप पर आकर यहां पर बस जाते हैं और जैसे ही जाड़ों का समय खत्म होता है यह उड़कर वापस सेंट्रल एशिया यह साइबेरिया की तरफ चले जाते हैं. इसे बार हेडेड गूज पक्षी कहा जाता है और यह भारत में हिमालय पार करके जाड़ों के समय में आ जाते हैं. आपको पता है यह पक्षी भी माइग्रेट होते समय जो कि वह सेंट्रल एशिया से भारत की तरफ आते हैं. उस समय वह 10:00 से 10:30 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़कर भारत आते हैं.

Bar-headed goose
Bar-headed goose

साधारणरूप से देखे तो पक्षी जमीन से केवल 500 फीट यानी 200 मीटर की ऊंचाई पर उड़ते हैं ताकि वह अपने एनर्जी को conserve करके रख सकें और किसी शिकारी पक्षी की नजर में ना आ सके। लेकिन जो पक्षी एक जगह से दूसरी जगह माइग्रेट करते हैं वह काफी ऊंचाई पर उड़ते हैं क्योंकि इतनी ऊंचाई पर उड़ने पर उन का तापमान बैलेंस बना रहता है।

और उन्हें डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम नहीं होती है दरअसल जब कोई पक्षी जमीन से आठ 9 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है तो वहां पर एयर प्रेशर बहुत ज्यादा कम होता है. जिसकी वजह से वहां पर गर्मी भी नीचे की तुलना में कम होती है और ऐसे में पक्षी जो कि एक जगह से दूसरे का माइग्रेट करते हैं उन्हें ऊंचा उड़ना अनुकूल कम होता है.

पक्षियों का शरीर की विशेष संरचना –

पक्षियों को इतना ज्यादा ऊंचा उठने में जो मदद करता है वह है उनका शारीरिक स्ट्रक्चर उनकी हड्डियां बिल्कुल खोखली होती हैं और उनके मसल्स और heart इतने मजबूत होते हैं की पंखों को फड़फड़ाने में उन्हें कोई समस्या ही नहीं होती है। उनके पास भरपूर एनर्जी होती है साथ ही साथ ऊंचाई पर उड़ने वाले इन हंसों में सबसे अच्छी बात तो यह होती है कि इनमें हीमोग्लोबिन का स्ट्रक्चर कुछ इस तरह होता है कि यह ज्यादा अमाउंट में ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल को अपने ऊपर लोड कर सकता है।

जिसकी वजह से पक्षियों को अपने शरीर के कोने-कोने तक ऑक्सीजन पहुंचाने में कोई दिक्कत नहीं होती है साथ ही इनमें एनर्जी का लेवल भी बनाए रखता है यही कारण है कि कुछ पक्षी जोकि mainly माइग्रेट करते हैं एक जगह से दूसरी जगह पर, वह काफी ऊंचाई पर उड़ पाते हैं.

बड़े पंख करते हैं मदद –

जब वैज्ञानिकों ने इन ऊंची उड़ने वाले पक्षियों पर अध्ययन किया तो पाया कि दुनिया में जितने भी ऐसे पक्षी हैं जो समुद्र तल से चार-पांच किलोमीटर की ऊंचाई से ज्यादा ऊपर उडते हैं. उन सभी पक्षियों के पंख उनके शरीर से काफी ज्यादा बड़ा होता है जिसके कारण से उनके पंख उन्हें ऊपर की ओर ज्यादा अपलिफ्ट करने में मदद कर पाते हैं.

साथ ही ऐसे पक्षी बहुत ही तेजी से सांस लेते हैं. दरअसल होता यह है कि जब हम मनुष्य समुद्र तल से चार-पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर चले जाते हैं तो हमें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है हमारा ब्लड का पीएच एल्कलाइन होने लगता है और पक्षियों के साथ भी ऐसा ही होता है पक्षी जब समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर जाते हैं तो वह बहुत ही तेजी से सांस लेने लगते हैं.

क्योंकि वहां पर एयर की डेंसिटी कम हो जाती है जहां उनका ब्लड भी एल्कलाइन हो जाता है. पर उनके लिए इस प्रकार से उनके ब्लड का एल्कलाइन हो जाना उनके लिए काफी मददगार भी होता है. जहां मनुष्य खून अलकालाइन हो जाने पर बेहोश हो जाता है या dizziness फील करता है.

पक्षियों के खून में हैं ऑक्सीजन bind करने की क्षमता –

वही पक्षियों के लिए ऐसी कोई भी समस्या आती ही नहीं है वह बहुत ही तेजी से सांस लेते हैं उनके पास हिमोग्लोबिन का structure ऐसा होता है जो बहुत ज्यादा ऑक्सीजन bind कर लेता है. जिसके कारण से उनके दिमाग में हमेशा energy का फ्लो बना रहता है और एक वैज्ञानिक शोध यह बताती है कि पक्षियों का इतना अच्छा शारीरिक स्ट्रक्चर और ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता उन्हें इससे और ज्यादा high-altitude उड़ने में मदद कर सकता है.

यानी पक्षी 12 किलोमीटर के एल्टीट्यूड से भी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकते हैं पर कुछ स्पेसिफिक टाइप की पक्षी जिनका पंख काफी बड़ा हो जो बहुत ही तेजी से hyperventalise कर पाए.

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