प्रोटीन का पाचन कैसे होता हैं – protein digestion hindi

देखिए आप हमेशा यह सुनते होंगे कि हमें दिन में इतना ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए. इसी प्रोटीन के वजह से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और हमारी muscle सुडौल बनी रहती है। नई-नई muscle का बनना और मसल्स में जो मरम्मत का काम है। इम्यूनिटी को बनाना यह सब प्रोटीन ही करता है। पर क्या आप कभी यह जान पाए हैं कि असल में प्रोटीन होता क्या है और इसका पाचन हमारे पेट में होता कैसे है?? चलिए इस article में हम ही जानते हैं.

प्रोटीन क्या है

देखिए अगर आपको यह समझना है कि प्रोटीन क्या है, तो आपको एक शब्द बहुत ही ढंग से अपने दिमाग में store कर लेना है, वह शब्द है अमीनो एसिड…. अमीनो एसिड क्या होता है, अमीनो एसिड एक कंपाउंड है, जो कार्बन हाइड्रोजन नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के कंबीनेशन से बनता है। और अब देखिए जब यही अमीनो एसिड आपस में मिलकर एक short चैन बना लेते हैं, मतलब कई सारे अमीनो एसिड आपस में मिलकर एक peptide bond के थ्रू आपस में जुड़ जाते हैं, तो यह एक अलग तरीके का ही मॉलिक्यूल बना लेते हैं, जिसे पेप्टाइड कहते हैं।

अब देखिए जब कई सारे peptides आपस में जुड़ते हैं, तो यह पॉलिपेप्टाइड नाम के मॉलिक्यूल को बनाते हैं और यही पॉलिपेप्टाइड अब क्या करते हैं, आपस में जुड़ कर जटिल कार्बनिक यौगिक बनाते हैं, जिसे प्रोटीन कहा जाता है। चलिए शॉर्ट में तो हम यह जान ही गए हैं कि आखिर प्रोटीन होता क्या है। बहुत डिटेल में ये जानने के लिए आपको बायोकेमिस्ट्री पढ़नी पड़ेगी, पर यह वीडियो तो बायोलॉजी से रिलेटेड है, इसलिए हम इसमें बहुत ज्यादा deep नहीं जाएंगे। अब चलिए सीधे यह जानते हैं कि इस ऑर्गेनिक एलिमेंट का डाइजेशन हमारे शरीर में होता कैसे हैं???

देखिए किसी प्रोटीन रिच फूड को जैसे ही हम अपने मुंह में डालते हैं, हम अपने मुंह में जैसे ही चबाने लगते हैं, तो प्रोटीन का मैकेनिकल डाइजेशन स्टार्ट हो जाता है, ध्यान रहे केमिकल ब्रेकडाउन प्रोटीन का हमारे ओरल कैविटी में नहीं होता है, क्योंकि हमारे सलाइवा में ऐसा कोई enzyme नहीं होता है, जो प्रोटीन को केमिकली ब्रेकडाउन करें। प्रोटीन का पाचन यानी केमिकल ब्रेकडाउन स्टार्ट होता है, स्टमक से, जैसे ही हम अपना भोजन अपने स्टमक के लिए निगलते हैं।

पेट में प्रोटीन का पाचन

और जैसे ही यह भोजन जो कि saliva से mix है, हमारे स्टमक में आता है, तुरंत ही हमारे स्टमक की दीवार से एसिड स्टमक में आता है, जोकि पैराइटल सेल से रिलीज होता है। ठीक उसी समय हमारे स्टमक के इनर लाइनिंग पर मौजूद चीफ सेल यह पेप्सिनोजेन नाम के एंजाइम को रिलीज करता है. लेकिन होता यह है कि यह pepsinogen जैसे ही acid के संपर्क में आता है, यह pepsin नाम के enzyme में कन्वर्ट हो जाता है, जो कि pepsinogen का ही एक्टिव फॉर्म होता है।

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और ये pepsin क्या करता है, यह प्रश्न हमारे स्टमक में आए प्रोटीन को large पॉलिपेप्टाइड मॉलिक्यूल में कन्वर्ट कर देता है। इनका ब्रेकडाउन कर देता है और यह जो पॉलिपेप्टाइड मॉलिक्यूल टूटे हुए थे, हमारे पेट में, अब यह हमारे छोटे आंत के पहले part duodenum में पास हो जाते हैं।

छोटी आंत में प्रोटीन का पाचन

Duodenum में जब से आधा पचा हुआ प्रोटीन ये large पॉलिपेप्टाइड बन चुका है, जैसे ही छोटी आंत के इस portion में आता है। छोटी आत में अब पेनक्रिएटिक जूस के साथ यह मिल जाता है।

और इसी pancreatic juice में दरअसल चार एंजाइम होते हैं, जो इन प्रोटीन के साथ मिलकर क्रिया करते हैं और उन्हें बिल्कुल छोटे-छोटे बिल्कुल प्रोटीन के मूल स्वरूप अमीनो एसिड में बदल देते हैं। जिसमें से पहला enzyme है trysinogen यह trysinogen क्या करता है। जैसे ही हमारे duudenum में आता है, हमारे duodenum के इनर लाइनिंग पर मौजूद enterokinas नाम का एक एंजाइम इसे ट्रिप्सिन हार्मोन में बदल देता है।

अब दिखे इसी पेनक्रिएटिक जूस में जो दूसरा एंजाइम होता है जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है, वह chymotrypsinogen. यह chymotrypsinogen जैसे ही ट्रिप्सिन के संपर्क में आता है, यह काइमोट्रिप्सिन नाम के enzyme में बदल जाता है। तीसरा enzyme जो पेनक्रिएटिक जूस में प्रोटीन को पचाने में मदद करता है, वह है procarboxypeptidase, लेकिन जैसे ही यह भी trypsin के संपर्क में आता है, यह भी carboxypeptidase में बदल जाता है। चौथा एंजाइम जो प्रोटीन के पाचन में मदद करता है वह है, proelastase यह भी जब ट्रिप्सिन के संपर्क में आता है, तो elastaseमें बदल जाता है।

अब देखिए हमें पता चल गया है कि पेनक्रिएटिक जूस से आने वाले एंजाइम ट्रिप्सिन काइमोट्रिप्सिन carboxypeptidase और elastase जैसे enzyme में बदल चुके हैं, मैं आपको short में ये बता दूं इन सभी चारों enzyme का काम ये होता है कि यह अंजाइम जो हमारे पेट में large पॉलिपेप्टाइड आए थे, उन सभी को यह छोटे-छोटे स्मॉलर पेप्टाइड्स में तोड़ देते हैं। जैसे dipeptides tripeptides और अमीनो एसिड में, जिसमें peptides के दो या तीन molecules आपस में जुड़े रहते हैं।

प्रोटीन का छोटे छोटे टुकडों में टूटना

अब देखिए हमारे छोटी आंत के lumen में हमें पता है डाइट पेप्टाइड्स ट्राई पेप्टाइड्स और अमीनो एसिड आ गए हैं। होता यह है कि इसी छोटी आंत के इनर लाइनिंग पर कुछ absoptive cell होते हैं। ये क्या करते है कि यही absorptive cell जिसे enterocytes भी कहते ही। dipeptides tripeptides और अमीनो एसिड को अपने अंदर absorb कर लेते हैं। इन enterocyte के अंदर एक एंजाइम होता है peptidase. ये क्या करता है इन सभी टाइप के dipeptides tripeptides को अमीनो एसिड में तोड़ देता है, और फिर जैसे ही जो प्रोटीन हम खाए थे, वह पूरी तरीके से अमीनो एसिड टूटा, वह सीधे हमारे ब्लड में absorb हो जाता है।

अब देखिए जैसे ही हमारे ब्लड में ये amino acid absorb हुआ। यह सीधे पोर्टल बिन के थ्रू हमारे लिवर में जाता है, जहां लिवर क्या करता है, अगर प्रोटीन यानी जो अमीनो एसिड है इसका consumption जरूरत से ज्यादा है, तो इसे फैटी एसिड में कन्वर्ट करके शरीर में स्टोर कर देता है। या अगर एलर्जी की जरूरत हो तो इसके जरिए इसी प्रोटीन से एनर्जी बनाता है। और नहीं तो मेन काम प्रोटीन का synthesis करता है। जिसमें लीवर में ही प्रोटीन का सिंथेसिस हो जाता है, कुछ जो ब्लड plasma के लिए जरूरी है, वह अमीनो एसिड वहां चला जाता है, कुछ जो मसल के मरम्मत के लिए जरूरी है वहां पर… कुछ शरीर की ग्रोथ के लिए, ऐसे करते-करते प्रोटीन पूरे शरीर में बंट जाता है। देखिए अमीनो एसिड की संख्या कुल 20 होती है, जिसे कुल दो भागों में बांट दिया गया है। एक essential अमीनो एसिड और 1 non essential अमीनो एसिड।

यह जो नॉन एसेंशियल अमीनो एसिड होते हैं, यह हमारे शरीर में ही बन जाते हैं, पर जो essential अमीनो एसिड होते हैं, असल में इन्हें हमें फल सब्जियों आदि चीजों से बाहर से लेना पड़ता है। यह हमारे शरीर में नहीं बनते हैं। यह एसेंशियल अमीनो एसिड संख्या में 9 होते हैं।

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