नाड़ी कैसे देखा जाता है? pulse rate in hindi

pulse rate in hindi – देखिये जब हमारा हृदय ब्लड पंप करता है, aorta के through पूरे शरीर में, तो वह ब्लड वेसल्स के अंदरूनी वॉल पर एक प्रेशर लगाता है, अंदर की ओर से… जिसके वजह से ब्लड वेसल्स की wall में stretch होता है यानी इलास्टिसिटी बढ़ जाती है। इसे blood pressure कहते हैं। जिसे normally एक्सपर्ट के अनुसार सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 120mmhg और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 80mmhg पर होना चाहिए।

देखिये जब हमारा heart धड़क कर खून शरीर में फैलाता है, तो यह केवल रक्त धमनियों पर ब्लड प्रेशर ही नही लगाता। बल्कि एक वेब भी जनरेट होती है, जो कि हर एक ventricle systole के साथ आर्टरी तक फैल जाती है। जैसे मानो जब दिल धड़कता है, तो उसी धड़कन के साथ ही हमारी रक्त धमनियां भी फड़कती रहती हैं।

हृदय की हर एक धड़कन के साथ हृदय लगभग 60 से 80 ml ब्लड aorta के थ्रू पूरे शरीर भर में फैलाता है। और जब ह्रदय पंप होकर ब्लड फैलता है, तब ब्लड उसके wall पर एक डिस्टेंशन और एलॉन्गेशन भी बनाता है, जो कि एक वेब के फॉर्म में पूरे ब्लड वेसल्स में फैल जाती है।

ब्लड के फोर्स के साथ निकलने से यह wave जनरेट होती है, और हर एक बड़ी आर्टरी पर जाकर यह detectable होती है। देखिये आपने भारत में कई ऐसे आयुर्वेदाचार्य और डॉक्टर को देखा होगा, जो आपके हाथ को पकड़ कर आपका नब्ज़ देखते हैं और यह बताते हैं कि आपको कोई बीमारी है या नहीं है। असल में वह यही वेव ही देखते हैं। जिसे पल्स (pulse rate in hindi) कहते हैं या फिर हमारा हार्ट रेट कहते हैं।

नाड़ी कहाँ देखते हैं (pulse rate in hindi)-

देखिये जो पल्स रेट होती है यानी हार्ट रेट वो केवल हमारे कलाई के आर्टरी पर ही नहीं देखी जा सकती है, बल्कि इस इमेज में जहां जहां आप देख पा रहे हैं, उन उन जगहों पर उंगली रखकर आप अपने पल्स रेट यानी हार्ट रेट को देख सकते हैं। इसके लिए आपको इन आर्टिरीज पर उंगली रखकर 1 मिनट में इंपल्स की संख्या को गिन कर आप अपने पल्स रेट को जान सकते हैं कि आपका heart 1 मिनट में कितनी बार धड़कता है।

जब यह दिल की धड़कन 100 से ज्यादा हो जाती है तो इसे tachycardia कहते हैं और जब 60 से नीचे हो जाती है तो उसे bradycardia के नाम से जाना जाता है.

देखिए जो हमारे दिल की धड़कन है, इसका रेगुलेशन कैसे होता है, यानी दिल की धड़कन कब तेजी से धड़कने लगेगी और कब धीमे धीमे से यह बातें होती है, हमारे नर्वस सिस्टम से… नर्वस सिस्टम में भी हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से। पर आपको यह बात हमेशा ध्यान रखना है कि कभी भी दिल की धड़कन का जनरेशन नर्वस सिस्टम नहीं करता, दिल खुद से ही धड़कता है, उसके पास अपना खुद का एक कंडक्शन सिस्टम होता है। इसलिए दिल को पूरे शरीर में एक यूनिक और सबसे महत्वपूर्ण दर्जा रखता है। (pulse rate in hindi)

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देखिए हमारा जो हार्ट रेट है मतलब हृदय का धड़कना, वह दरअसल रेगुलेट होता है, हमारे पैरासिंपैथेटिक और सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम के जरिए। वह कैसे?? देखिये हमारे ब्रेन के medula oblongata में हमारे हृदय के हार्टबीट को रेगुलेट करने के लिए वेसोमोटर सेंटर होता है। जोकि हमारे शरीर के अनुसार सेंसरी इंफॉर्मेशन लेकर हमारे हृदय की गति को कम या तेज करता रहता है।

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देखिए हमारे एक्सटर्नल एनवायरमेंट से जैसे ही कोई इंफॉर्मेशन जाती है, हमारे ब्रेन को… हाइपोथैलेमस और मोटर cortex एक्टिवेट होकर हमारे वेसोमोटर सेंटर के जरिए impulses भेजते हैं, हमारे हृदय को तेज धड़कने के लिए। आप समझ गए होंगे कि यह सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम का हिस्सा है। क्योंकि सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम का काम हमारे हृदय की गति को बढ़ाना होता है और दरअसल यह सिंपैथेटिक नर्व फाइबर होते हैं, जो कि हृदय से जुड़े हुए होते हैं, यह हमारे थोरेसिक रीजन से t1, t2, t3 t4 जैसे nerve होते हैं. और ये हृदय की धड़कन को कैसे बढ़ा देते हैं। दरअसल ये ब्लड वेसल्स को constrict कर के हृदय की गति को बढ़ा देते हैं।

देखिए हमारे aortic arch में और करॉटिड साइनस में barroreceptor होते हैं और कीमोरिसेप्टर होते हैं. जो ब्लड प्रेशर को चेंज करके और ब्लड में केमिकल इंबैलेंस sense करके यह इंफॉर्मेशन भेजते हैं vasomotor centre को और यह vasomotor center वेगस नर्व के थ्रू हमारे ब्लड वेसल्स को सिग्नल भेजता है dilate होने को, जिससे हमारे हृदय को कम मेहनत लगती है। blood को पूरे शरीर मे पहुचाने की, और heart beat कम हो जाती हैं। ये parasympthetic nervous system का हिस्सा होता हैं।

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