भूकंप क्या है? कारण, रिक्टर स्केल, प्रकार और बचाव के उपाय (Earthquake in Hindi)
भूकंप धरती की सतह का अचानक काँप उठना है। यह पृथ्वी के अंदर जमा हुई ऊर्जा के अचानक निकलने से होता है। इस लेख में आसान हिंदी में समझिए कि भूकंप क्यों आता है, इसे कैसे नापा जाता है और आने पर क्या करना चाहिए।
एक नज़र में
| भूकंप को नापने वाले यंत्र को क्या कहते हैं? | सिस्मोग्राफ। |
| रिक्टर स्केल की खोज किसने की? | चार्ल्स रिक्टर ने 1935 में। |
| भारत में सबसे ज़्यादा भूकंप खतरे वाला ज़ोन कौन सा है? | ज़ोन V। |
| भूकंप मापने का यंत्र क्या है? | सिस्मोग्राफ। |
| सबसे तेज़ भूकंपीय तरंग? | P तरंग। |
| भारत में सबसे संवेदनशील भूकंप क्षेत्र? | ज़ोन V। |
मुख्य बातें
- पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बँटी है, जिन्हें विवर्तनिक प्लेट (टेक्टोनिक प्लेट) कहते हैं।
- पृथ्वी के अंदर जिस जगह से कंपन शुरू होता है, उसे उद्गम केंद्र या focus (hypocentre) कहते हैं।
- भूकंप से तीन मुख्य प्रकार की तरंगें निकलती हैं।
- भूकंप की तीव्रता नापने के दो तरीके प्रचलित हैं।
- भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर चार क्षेत्रों (ज़ोन II, III, IV और V) में बाँटा गया है।
भूकंप क्या है और क्यों आता है
पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बँटी है, जिन्हें विवर्तनिक प्लेट (टेक्टोनिक प्लेट) कहते हैं। ये प्लेटें बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, रगड़ खाती हैं या एक दूसरे के नीचे धँसती हैं, तो चट्टानों में तनाव जमा होता है। तनाव जब सहन की सीमा से बढ़ जाता है तो चट्टानें अचानक टूटती हैं और ऊर्जा तरंगों के रूप में निकलती है। यही भूकंप है।
ज़्यादातर भूकंप प्राकृतिक होते हैं, लेकिन ज्वालामुखी विस्फोट, बड़े बाँध के जलाशय, खनन और परमाणु परीक्षण जैसी वजहों से भी हल्के भूकंप आ सकते हैं।
अधिकेंद्र और उद्गम केंद्र
पृथ्वी के अंदर जिस जगह से कंपन शुरू होता है, उसे उद्गम केंद्र या focus (hypocentre) कहते हैं। इस बिंदु के ठीक ऊपर सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र (epicentre) कहते हैं। सबसे ज़्यादा नुकसान आम तौर पर अधिकेंद्र के पास होता है, और जितना कम गहरा उद्गम केंद्र होता है, सतह पर उतना ज़्यादा झटका महसूस होता है।
भूकंपीय तरंगें
भूकंप से तीन मुख्य प्रकार की तरंगें निकलती हैं। P तरंगें (प्राथमिक) सबसे तेज़ चलती हैं और ठोस, द्रव और गैस तीनों से गुज़र सकती हैं। S तरंगें (द्वितीयक) धीमी होती हैं और केवल ठोस माध्यम से गुज़रती हैं। सतही तरंगें (L तरंगें) सबसे धीमी होती हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा विनाश यही करती हैं। इन तरंगों को सिस्मोग्राफ नाम के यंत्र से दर्ज किया जाता है।
भूकंप को कैसे नापते हैं
भूकंप की तीव्रता नापने के दो तरीके प्रचलित हैं। पहला है परिमाण (मैग्नीट्यूड), जो भूकंप में निकली ऊर्जा बताता है। रिक्टर स्केल की शुरुआत 1935 में चार्ल्स रिक्टर ने की थी, और आजकल बड़े भूकंपों के लिए मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल ज़्यादा इस्तेमाल होता है। इन पैमानों पर एक अंक बढ़ने का मतलब कंपन के आयाम में लगभग 10 गुना और ऊर्जा में लगभग 32 गुना बढ़ोतरी है।
दूसरा तरीका मर्केली तीव्रता पैमाना है, जो I से XII तक होता है और बताता है कि किसी जगह भूकंप का असर इंसानों और इमारतों पर कितना पड़ा। यानी रिक्टर ऊर्जा नापता है और मर्केली असर।
भारत में भूकंपीय क्षेत्र
भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर चार क्षेत्रों (ज़ोन II, III, IV और V) में बाँटा गया है। ज़ोन V सबसे ज़्यादा जोखिम वाला है, जिसमें जम्मू-कश्मीर का कुछ हिस्सा, उत्तर-पूर्वी राज्य, गुजरात का कच्छ क्षेत्र और अंडमान-निकोबार शामिल हैं। भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट से टकराने के कारण हिमालयी क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील है।
भारत के हाल के बड़े भूकंपों में 26 जनवरी 2001 का गुजरात (भुज) भूकंप शामिल है, जिसकी तीव्रता लगभग 7.7 थी। दुनिया में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंप 1960 का चिली (वाल्दिविया) भूकंप माना जाता है, जिसकी तीव्रता लगभग 9.5 थी।
भूकंप के समय क्या करें
घर या इमारत के अंदर हों तो झुकें, मज़बूत मेज़ के नीचे जाकर सिर और गर्दन को ढकें और झटके रुकने तक वहीं रहें। खिड़कियों, शीशों और भारी अलमारियों से दूर रहें। बाहर हों तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर खुले स्थान पर जाएँ। लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। झटके थमने के बाद गैस और बिजली बंद करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
भूकंप कैसे आता है
पृथ्वी की ऊपरी परत (स्थलमंडल) कई विशाल प्लेटों में बँटी है। ये प्लेटें धीरे-धीरे खिसकती हैं और जब टकराती, रगड़ खाती या अलग होती हैं तो उनके किनारों पर तनाव जमा होता है। जब यह तनाव चट्टानों की सहन-शक्ति से ज़्यादा हो जाता है, तो अचानक ऊर्जा निकलती है और कंपन फैलते हैं। इसे भूकंप कहते हैं। इस सिद्धांत को प्लेट विवर्तनिकी (प्लेट टेक्टोनिक्स) कहते हैं।
अधिकेंद्र, फोकस और तरंगें
जिस स्थान पर चट्टानें टूटती हैं उसे भूकंप का फोकस (उद्गम केंद्र) कहते हैं, और उसके ठीक ऊपर सतह के बिंदु को अधिकेंद्र (एपिसेंटर)। भूकंप की तरंगें तीन प्रकार की होती हैं: P तरंगें (प्राथमिक, सबसे तेज़ और ठोस-द्रव दोनों में चलती हैं), S तरंगें (द्वितीयक, केवल ठोस में) और सतह तरंगें (सबसे विनाशकारी)। भूकंप मापने वाले यंत्र को सिस्मोग्राफ कहते हैं।
तीव्रता का पैमाना
भूकंप की ऊर्जा का माप रिक्टर पैमाने (या आधुनिक आघूर्ण परिमाण पैमाने) पर होता है, जो लघुगणकीय है, यानी हर एक अंक बढ़ने पर कंपन लगभग दस गुना और ऊर्जा लगभग 32 गुना बढ़ती है। प्रभाव की तीव्रता नापने के लिए मरकैली पैमाना इस्तेमाल होता है। 2.0 से कम के कंपन अक्सर महसूस नहीं होते, जबकि 7 और उससे ऊपर के भूकंप बड़ा विनाश कर सकते हैं।
भारत में भूकंप क्षेत्र
भारत को भूकंपीय खतरे के आधार पर चार क्षेत्रों (II से V) में बाँटा गया है। हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर, कच्छ और अंडमान-निकोबार ज़ोन V में आते हैं, जो सबसे संवेदनशील है। भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराती है, जिससे हिमालय बनता है। 2001 का गुजरात (भुज) भूकंप, 2015 का नेपाल भूकंप और 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप चर्चित हैं।
सुरक्षा के उपाय
भूकंप के समय "झुको, ढको और पकड़ो" (Drop, Cover, Hold on) अपनाएँ: मज़बूत मेज़ के नीचे बैठें और सिर को बचाएँ। खिड़कियों, शीशे और भारी अलमारियों से दूर रहें। बाहर हों तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर खुले स्थान में जाएँ। मकान बनाते समय भूकंपरोधी डिज़ाइन और भारतीय मानक कोड का पालन करें।
भूकंप तरंगें
| तरंग | गति | किसमें चलती है |
|---|---|---|
| P (प्राथमिक) | सबसे तेज़ | ठोस और द्रव दोनों |
| S (द्वितीयक) | P से धीमी | केवल ठोस |
| सतह तरंगें | सबसे धीमी | सतह पर, सबसे विनाशकारी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भूकंप को नापने वाले यंत्र को क्या कहते हैं?
सिस्मोग्राफ।
रिक्टर स्केल की खोज किसने की?
चार्ल्स रिक्टर ने 1935 में।
भारत में सबसे ज़्यादा भूकंप खतरे वाला ज़ोन कौन सा है?
ज़ोन V।
भूकंप मापने का यंत्र क्या है?
सिस्मोग्राफ।
सबसे तेज़ भूकंपीय तरंग?
P तरंग।
भारत में सबसे संवेदनशील भूकंप क्षेत्र?
ज़ोन V।
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