दुनिया का सबसे छोटा महासागर कौन सा है

सबसे छोटा महासागर (sabse chota mahasagar) – हमारे पूरी पृथ्वी 51 करोड़ किलोमीटर स्क्वायर सरफेस एरिया में फैली हुई है. और इस 51 करोड़ किलोमीटर स्क्वायर क्षेत्र में से 36 करोड़ किलोमीटर स्क्वायर पर तो पानी से भरा हुआ है. और केवल 14 करोड़ किलोमीटर स्क्वायर की जमीन हम मनुष्य को मिली है रहने के लिए.

इन्हीं में हमारा पूरा महाद्वीप बटा हुआ है. एक आर्टिकल में होंगे जान चुका है कि इस दुनिया का सबसे बड़ा महासागर प्रशांत महासागर है. जो कि पूरे पृथ्वी पर पानी के हिस्से का 46% हिस्सा कवर करता है. कुल मिलाकर साढ़े 16 किलोमीटर में फैला हुआ है. बहुत बड़ा है इतने बड़े क्षेत्र को कभी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

क्योंकि दुनिया का कोई भी कॉन्टिनेंट इतना बड़ा नहीं है. यहां तक कि हमारे पूरे पृथ्वी पर जितनी भी जमीन है सबको मिला दे तब भी वह प्रशांत महासागर के क्षेत्रफल की बराबरी नहीं कर सकता है. पर क्या हम दुनिया का सबसे छोटा महासागर कि हम कल्पना कर सकते हैं.

क्या दुनिया के सबसे छोटा महासागर को हम दुनिया के किसी कॉन्टिनेंट से यानी महाद्वीप से तुलना कर सकते हैं. इसके लिए तो पहले हमें यह जाना पड़ेगा कि दुनिया का सबसे छोटा महासागर कौन सा हैं. तो चले बिना समय गवाएं पहले यह जान लेते है….

दुनिया का सबसे छोटा महासागर –

दुनिया का सबसे छोटा महासागर आर्कटिक महासागर है. जो कि बिल्कुल उत्तर में है. यह बिल्कुल उत्तरी ध्रुव से लगा हुआ है. इसलिए यह महासागर सर्दियों के समय में पूरी तरीके से जम जाता है. इसलिए इस महासागर को उत्तरी ध्रुवीय महासागर के नाम से भी जाना जाता है. यह विश्व के पांच महासागरों में गिना जाता है पर सबसे छोटे महासागरों में आता है.

दुनिया का सबसे छोटा महासागर कौन सा है
दुनिया का सबसे छोटा महासागर कौन सा है

और यह महासागर पूर्व में यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका से घिरा हुआ है. आर्कटिक महासागर साल भर पूरी तरीके से जमा ही रहता है. पर सर्दियों के समय में पूर्ण रूप में जम जाता है. आर्कटिक महासागर 1,40,00,000 किलोमीटर स्क्वायर के क्षेत्र में फैला हुआ है और यह क्षेत्रफल की दृष्टि से देखे तो अंटार्कटिका महाद्वीप के जितना ही है.

आर्कटिक महासागर दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से क्षेत्रफल की दृष्टि से डेढ़ गुना ज्यादा बड़ा है और इसका हमारे पृथ्वी के मौसम को बनाए रखने में बहुत ज्यादा महत्व है. क्योंकि उत्तरी ध्रुव होने के कारण यहां पर पृथ्वी का ज्यादातर बर्फ का हिस्सा यानी ग्लेशियर उत्तरी ध्रुव इसी आर्कटिक महासागर में ही है.