अंडमान निकोबार द्वीपसमूह का निर्माण कैसे हुआ?
अंडमान-निकोबार द्वीप समुद्र के नीचे की एक पर्वत-श्रृंखला के ऊँचे शिखर हैं। यह श्रृंखला म्यांमार की अराकान योमा पर्वतमाला का समुद्र में जारी रूप मानी जाती है।
एक नज़र में
| अंडमान-निकोबार कैसे बने? | भारतीय प्लेट के सबडक्शन से बनी समुद्री पर्वतमाला के शिखर द्वीप बने। |
| भारत का सक्रिय ज्वालामुखी कौन सा है? | बैरन द्वीप, अंडमान सागर में। |
| अंडमान और निकोबार को कौन सा चैनल अलग करता है? | 10 डिग्री चैनल। |
| अंडमान-निकोबार की राजधानी कौन सी है? | पोर्ट ब्लेयर। |
| भारत का दक्षिणतम बिंदु कौन सा है? | इंदिरा पॉइंट, ग्रेट निकोबार द्वीप पर। |
| नारकोंडम किस प्रकार का ज्वालामुखी माना जाता है? | सुप्त (डॉर्मेंट)। |
मुख्य बातें
- भारतीय प्लेट बर्मा माइक्रोप्लेट के नीचे धँस रही है, जिसे सबडक्शन कहते हैं।
- अंडमान सागर में स्थित बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है।
- अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बीच लगभग 700 किलोमीटर से अधिक लंबी द्वीप-शृंखला है, जो उत्तर से दक्षिण फैली है।
- भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह द्वीप-शृंखला उस सबडक्शन ज़ोन के ऊपर बनी है जहाँ भारतीय प्लेट, बर्मा/सुंडा प्लेट के नीचे धँसती है।
- बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है, जबकि नारकोंडम द्वीप को सुप्त (डॉर्मेंट) ज्वालामुखी माना जाता है।
निर्माण की प्रक्रिया
भारतीय प्लेट बर्मा माइक्रोप्लेट के नीचे धँस रही है, जिसे सबडक्शन कहते हैं। इस टकराव से तलछट और चट्टानें ऊपर उठीं और समुद्र के भीतर पर्वतमाला बनी। इसके कुछ शिखर समुद्र तल से ऊपर निकले, जो आज द्वीपों के रूप में दिखते हैं।
यही क्षेत्र भूकंप और सुनामी के लिए संवेदनशील है। वर्ष 2004 की सुनामी इसी सबडक्शन ज़ोन के भूकंप से उठी थी।
ज्वालामुखी और बैरन द्वीप
अंडमान सागर में स्थित बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। यह समय-समय पर लावा और राख उगलता रहा है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| प्रकार | ज्वालामुखीय द्वीप |
| स्थान | अंडमान सागर |
| स्थिति | सक्रिय ज्वालामुखी |
द्वीपों की विशेषताएँ
- लगभग 570 से अधिक द्वीप-द्वीपिकाएँ, जिनमें कुछ ही आबाद हैं
- घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन
- मूंगा चट्टानें और समृद्ध समुद्री जीवन
- 10 डिग्री चैनल अंडमान और निकोबार को अलग करता है
भौगोलिक स्थिति और बनावट
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बीच लगभग 700 किलोमीटर से अधिक लंबी द्वीप-शृंखला है, जो उत्तर से दक्षिण फैली है। सामान्यतः इसमें 500 से अधिक छोटे-बड़े द्वीप और द्वीपिकाएँ गिनी जाती हैं, पर गिनती का तरीका अलग होने से अलग स्रोतों में संख्या बदलती है। केवल कुछ ही द्वीपों पर आबादी है।
| भाग | विशेषता |
|---|---|
| अंडमान | उत्तर, मध्य और दक्षिण अंडमान सहित बड़े द्वीप, राजधानी पोर्ट ब्लेयर |
| निकोबार | कार निकोबार, नानकौरी, ग्रेट निकोबार आदि |
| 10 डिग्री चैनल | अंडमान और निकोबार के बीच जलमार्ग |
| इंदिरा पॉइंट | भारत का दक्षिणतम बिंदु, ग्रेट निकोबार में |
अंडमान की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक है, जिसकी ऊँचाई लगभग 732 मीटर मानी जाती है। इन द्वीपों की ज़मीन पहाड़ी है और घने वर्षावनों से ढकी है।
भूवैज्ञानिक इतिहास
भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह द्वीप-शृंखला उस सबडक्शन ज़ोन के ऊपर बनी है जहाँ भारतीय प्लेट, बर्मा/सुंडा प्लेट के नीचे धँसती है। लाखों वर्षों की इस प्रक्रिया में समुद्र तल की चट्टानें, तलछट और समुद्री पपड़ी के टुकड़े दबाव से ऊपर उठे। इसलिए यहाँ अवसादी चट्टानों के साथ समुद्री तल की चट्टानें (ओफियोलाइट) भी मिलती हैं।
यह पर्वतमाला उत्तर में म्यांमार की अराकान योमा से जुड़ती और दक्षिण में इंडोनेशिया के सुमात्रा-जावा चाप की ओर बढ़ती है। इसी कारण इसे "ज्वालामुखीय द्वीप चाप" का हिस्सा माना जाता है। इसकी सटीक आयु और विकास पर अब भी शोध जारी है, इसलिए पाठ्यपुस्तकों में अलग-अलग भूवैज्ञानिक काल बताए मिल सकते हैं।
ज्वालामुखी, भूकंप और सुनामी
बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है, जबकि नारकोंडम द्वीप को सुप्त (डॉर्मेंट) ज्वालामुखी माना जाता है। बाराटांग क्षेत्र में कीचड़ वाले ज्वालामुखी (मड वोल्केनो) भी हैं।
26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा के पास रिक्टर पैमाने पर करीब 9 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे हिंद महासागर में भयंकर सुनामी उठी। अंडमान-निकोबार इससे बुरी तरह प्रभावित हुए। कुछ क्षेत्रों में ज़मीन ऊपर उठी या धँसी और निकोबार में जनहानि अधिक हुई। इस घटना के बाद भारत ने सुनामी पूर्व-चेतावनी प्रणाली विकसित की।
जनजातियाँ, पर्यावरण और संरक्षण
यहाँ ग्रेट अंडमानी, ओंगे, जारवा और सेंटिनली जैसी आदिम जनजातियाँ तथा निकोबारी और शोम्पेन समुदाय रहते हैं। जारवा और सेंटिनली क्षेत्रों में बाहरी लोगों का प्रवेश कानूनन सीमित है ताकि उनकी सुरक्षा हो सके।
- द्वीपों पर अनेक स्थानिक (एंडेमिक) पक्षी, पौधे और जीव मिलते हैं
- मूंगा चट्टानें, मैंग्रोव और वर्षावन जैव-विविधता के केंद्र हैं
- कई क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान, जैव-मंडल आरक्षित क्षेत्र और अभयारण्य घोषित हैं
- पर्यटन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है
परीक्षा के लिए उपयोगी तथ्य
अंडमान-निकोबार केंद्र शासित प्रदेश है और इसकी राजधानी पोर्ट ब्लेयर है। सेल्युलर जेल यहीं स्थित है, जहाँ ब्रिटिश काल में स्वतंत्रता सेनानियों को भेजा जाता था। इसे अब राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त है। भूगोल की परीक्षाओं में "ज्वालामुखी, चैनल और सबसे ऊँची चोटी" से जुड़े प्रश्न अक्सर आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंडमान-निकोबार कैसे बने?
भारतीय प्लेट के सबडक्शन से बनी समुद्री पर्वतमाला के शिखर द्वीप बने।
भारत का सक्रिय ज्वालामुखी कौन सा है?
बैरन द्वीप, अंडमान सागर में।
अंडमान और निकोबार को कौन सा चैनल अलग करता है?
10 डिग्री चैनल।
अंडमान-निकोबार की राजधानी कौन सी है?
पोर्ट ब्लेयर।
भारत का दक्षिणतम बिंदु कौन सा है?
इंदिरा पॉइंट, ग्रेट निकोबार द्वीप पर।
नारकोंडम किस प्रकार का ज्वालामुखी माना जाता है?
सुप्त (डॉर्मेंट)।
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नोट: आँकड़े और रैंकिंग समय के साथ बदल सकते हैं। परीक्षा या शोध से पहले आधिकारिक स्रोत से मिलान करें। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं।