वीर्य का निर्माण कैसे होता हैं – formation of semen in hindi

एक बहुत ही बड़ी जिज्ञासा जो भारतीय पुरुषों के मन में और नवयुवकों के मन में हमेशा ही बनी रहती है कि हमारा यह वीर्य बनता कैसे है। क्योंकि कई सारे लोगों ने इसके बारे में ऐसे ऐसे myth फैला रखे हैं कि लोग पूरी तरीके से कंफ्यूज हो चुके हैं। कोई कहता है 40 बूंद खून से एक बूंद वीर्य, तो कोई कहता है कि यह सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है हमारी बॉडी में। चलिए इन सब से दूर हट कर केवल इतना जानते हैं कि हमारा वीर्य बनता कैसे है।

देखिए हम सभी बात जानते होंगे कि हमारे sperm का निर्माण होता है, हमारे testicles के अंदर यानी वृषण के अंदर, मैंने आपको अपने अंडकोष की संरचना वाले वीडियो में यह बात बता रखा है कि हमारा जो टेस्टिस होता है, जब हम उसे काट के देखते हैं तो हम पाते हैं कि हमारा टेस्टिकल्स कई सारे lobules में बंटा हुआ है, जिसके अंदर कई सारे पतले पतले tubules होते हैं। जिसे semniferous tubules कहते हैं।

सेमिनिफरस  tubules के अंदर ही हमारे sperm का निर्माण होता है। जब हम अपने इन tubules को cross section में काट के देखेंगे। तो हम पाएंगे कि हमारा सेमनिफेरोस tubules कुछ इस तरीके से दिखाई पड़ता है।

देखिए सेमिनिफरस ट्यूबल्स के अंदर primarily 2 सेल पाई जाती हैं। यह है spermatogonia और यह है sertoli cell. देखिए इस स्पेर्मेटोगोनिया सेल का काम क्या होता है कि ये सेल खुद को विभाजित करके हमारे अंदर शुक्राणुओं का निर्माण करता है। इसके कई सारे चरण होते हैं यानी कई स्वरूपों में बदलते हुए शुक्राणुओं का रूप ले लेता है।

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वही इस सरटोली सेल का काम क्या होता है कि ये हमारे शुक्राणुओं को बनाने के लिए जो प्रमुख स्टेम सेल होती है, स्पर्मेटोगोनिया उन्हें पोषण प्रदान करते हैं। इन्हीं सेल के पोषण के द्वारा ही विभिन्न चरणों से होते हुए स्पर्मेटोगोनिया सेल शुक्राणुओं में परिवर्तित हो जाती है। अब चलिए जानते हैं कि ये स्पेर्मेटोगोनिया शुक्राणुओं में कैसे बदलती है।

देखिए सबसे पहले होता क्या है कि यह स्पर्मेटोगोनिया सेल अपने आपको माइटोसिस करके दो भागों में बांट लेता है, माइटोसिस सेल डिविजन का वह भाग है जहां पर गुणसूत्रों का विभाजन हर एक cell में बराबर होता है। जैसे ही स्पर्मेटोगोनिया दो सेल में बटा एक सेल तो खुद को नए सेल को डिवेलप करने के लिए यथावत बनाया रहता है। दूसरा सेल अब प्राइमरी स्पर्मेटोसाइट बन जाता है, और आगे की प्रोसेस के लिए यानी खुद को स्पर्म बढ़ाने के लिए आगे बढ़ता जाता है।

अब इसी प्राइमरी स्पर्मेटोसाइट का mieosis होता है, जहां पर यह प्राइमरी स्पर्मेटोसाइट अब विभाजित होकर 2 cell में तो बंट ही जाता है। अब इसमें गुणसूत्रों का विभाजन भी आधा आधा हो जाता है, आप अपने स्कूल में माइटोसिस और मयोसिस तो पढ़े ही होंगे।

Mieosis में गुणसूत्रों का विभाजन आधा-आधा होता है और माइटोसिस में गुणसूत्रों का विभाजन हर एक सेल में बराबर ही होता है।

अब यह सेल सेकेंडरी स्पर्मेटोसाइट कहलाती है अब mieosis 2 में यही दो सेल्स फिर 2 सेल में विभाजित हो जाती है, जोकि अब स्पर्मेटिड कहीं जाने लगती हैं। spermatid एक संपूर्ण विकसित हुए स्पर्म के ठीक पहले वाला स्टेज है। होता यह है कि टेस्टोस्टेरोन के कारण से धीरे-धीरे यह स्पर्मेटिड्स के ऊपर अब टेल्स डिवेलप हो जाती है कुछ दिनों के बाद। उसके बाद जो डिवेलप हुई सेल हमें मिलता है वह कहलाता है spermatozoa या जिसे हम स्पर्म के नाम से भी जानते हैं।

होता यह है कि सेमिनिफरस ट्यूबल्स से यह स्पर्म अब सेमिनिफरस ट्यूबल्स के lumen में आ जाते हैं, और स्पर्मेटोगोनिया से स्पर्म बनने का यह प्रक्रिया कुल 74 दिन तक चलता है। और स्पर्मेटिड से स्पर्म बनने की प्रक्रिया को स्पर्मियोजेनेसिस कहा जाता है।

एक बार स्पर्म बन गया उसके बाद यह sperm धीरे-धीरे से सेमनिफेरोस tubule से push होते-होते rete testis से आते हुए हमारे एपीडिड्यमिस में आकर store हो जाते हैं जहां पर हमारे ऊपर मोमेंट करना सीखते हैं और यहीं पर आकर हमारे sperm mature भी होते हैं और तब तक तो रहते हैं जब तक उन्हें इजेकुलेट नहीं कर दिया जाता।

देखिए सेक्सुअल इंटरकोर्स और मास्टरबेशन के दौरान होता क्या है कि जब व्यक्ति एक्साइटेड होकर अपने इजेकुलेशन पर आता है। तब तब यही हमारा स्पर्म सेमिनल फ्लुएड जो कि हमारे सेमिनल वेसिकल्स में स्टोर रहता है, और हमारे प्रोस्टेट से निकलने वाले कुछ fluid से मिलकर सीमन यानी वीर्य बन जाता है। मतलब हमारे वीर्य में हमारे शुक्राणु होते हैं और कुछ प्रोटीन वगैरह के लिक्विड होते हैं, जिसे कंबाइन करके ही हम वीर्य कहते हैं।

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