लक्षद्वीप का निर्माण कैसे हुआ? प्रवाल द्वीप की कहानी
अंडमान से अलग, लक्षद्वीप ज्वालामुखी या पर्वतों से नहीं बल्कि प्रवाल (कोरल) जीवों से बने द्वीप हैं। ये अरब सागर में केरल तट के पश्चिम में स्थित हैं।
एक नज़र में
| लक्षद्वीप किससे बना है? | मूंगा (कोरल) जीवों के कंकाल से बने एटोल। |
| एटोल क्या है? | कोरल से बना छल्लेनुमा द्वीप जिसके बीच लैगून होता है। |
| लक्षद्वीप की राजधानी? | कवरत्ती। |
| एटोल किसे कहते हैं? | कोरल से बना छल्लेनुमा द्वीप जिसके बीच लैगून होता है। |
| मिनिकॉय किस चैनल से अलग है? | नाइन डिग्री चैनल से मिनिकॉय शेष लक्षद्वीप से अलग है। |
| लक्षद्वीप का कुल भूमि क्षेत्र कितना है? | लगभग 32 वर्ग किलोमीटर। |
मुख्य बातें
- माना जाता है कि ये द्वीप चागोस-लक्षद्वीप पनडुब्बी कटक पर बने हैं, जो प्राचीन ज्वालामुखीय चट्टानी आधार है।
- द्वीपों की कुल भूमि बहुत कम है और ये समुद्र तल से बहुत थोड़े ऊपर हैं, इसलिए जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर बढ़ने का खतरा रहता है।
- लक्षद्वीप अरब सागर में केरल तट से लगभग 200 से 440 किलोमीटर दूर बिखरे द्वीपों का समूह है।
- प्रवाल (कोरल) पॉलिप छोटे समुद्री जीव हैं जो गर्म, साफ़ और उथले पानी में कॉलोनी बनाकर रहते हैं।
- लक्षद्वीप चागोस-लक्षद्वीप कटक पर स्थित है, जो हिंद महासागर में उत्तर से दक्षिण फैली पनडुब्बी पर्वत-श्रृंखला है।
प्रवाल द्वीप कैसे बनते हैं
माना जाता है कि ये द्वीप चागोस-लक्षद्वीप पनडुब्बी कटक पर बने हैं, जो प्राचीन ज्वालामुखीय चट्टानी आधार है। समुद्र की सतह के पास गर्म, उथले पानी में कोरल पॉलिप जीव कैल्शियम कार्बोनेट का कंकाल बनाते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी मरे हुए कोरल पर नए कोरल बढ़ते गए और चट्टान ऊपर उठती गई।
आधार के धीरे-धीरे धँसने के साथ कोरल ऊपर बढ़ते रहे और अंत में छल्ले जैसी रचना बनी, जिसे एटोल कहते हैं। बीच के उथले पानी को लैगून कहते हैं।
मुख्य तथ्य
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| समुद्र | अरब सागर |
| मूल प्रकार | प्रवाल द्वीप (एटोल) |
| राजधानी | कवरत्ती |
| स्थिति | केंद्र शासित प्रदेश |
द्वीपों की कुल भूमि बहुत कम है और ये समुद्र तल से बहुत थोड़े ऊपर हैं, इसलिए जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर बढ़ने का खतरा रहता है।
अंडमान से अंतर
- अंडमान: पर्वतमाला के शिखर, कुछ ज्वालामुखीय, घने जंगल
- लक्षद्वीप: कोरल से बने, समतल और रेतीले
- अंडमान बंगाल की खाड़ी में, लक्षद्वीप अरब सागर में
लक्षद्वीप की भौगोलिक स्थिति
लक्षद्वीप अरब सागर में केरल तट से लगभग 200 से 440 किलोमीटर दूर बिखरे द्वीपों का समूह है। कुल भूमि क्षेत्र केवल लगभग 32 वर्ग किलोमीटर है, पर इसके आसपास का लैगून और समुद्री क्षेत्र बहुत बड़ा है। लगभग 36 द्वीप और द्वीपिकाएँ गिनी जाती हैं, जिनमें केवल करीब 10 पर स्थायी आबादी है।
| द्वीप/जलमार्ग | महत्व |
|---|---|
| कवरत्ती | प्रशासनिक राजधानी |
| मिनिकॉय | सबसे दक्षिणी बड़ा द्वीप |
| अगत्ती | हवाई अड्डा, पर्यटन |
| नाइन डिग्री चैनल | मिनिकॉय को शेष द्वीपों से अलग करता है |
| एट डिग्री चैनल | मिनिकॉय और मालदीव के बीच |
एटोल कैसे बनता है
प्रवाल (कोरल) पॉलिप छोटे समुद्री जीव हैं जो गर्म, साफ़ और उथले पानी में कॉलोनी बनाकर रहते हैं। ये समुद्री जल से कैल्शियम लेकर कठोर कंकाल बनाते हैं। हज़ारों वर्षों में मरे कोरल के ऊपर नई कॉलोनियाँ बढ़ती हैं और चट्टान ऊँची उठती जाती है।
चार्ल्स डार्विन ने बताया था कि पहले ज्वालामुखीय द्वीप के चारों ओर किनारे की चट्टान (फ्रिंजिंग रीफ) बनती है। द्वीप धीरे-धीरे धँसता है और कोरल ऊपर बढ़ते हैं, तो बाधा चट्टान (बैरियर रीफ) बनती है। अंत में केंद्रीय द्वीप समुद्र में डूब जाता है और केवल छल्ले जैसी कोरल चट्टान बचती है, जिसे एटोल कहते हैं। बीच का शांत पानी लैगून कहलाता है।
लक्षद्वीप का भूवैज्ञानिक आधार
लक्षद्वीप चागोस-लक्षद्वीप कटक पर स्थित है, जो हिंद महासागर में उत्तर से दक्षिण फैली पनडुब्बी पर्वत-श्रृंखला है। यह आगे मालदीव और चागोस द्वीपसमूह तक जाती है। आम मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति रीयूनियन हॉटस्पॉट से जुड़ी है, जिसका संबंध दक्कन ट्रैप के ज्वालामुखी से भी बताया जाता है। यह विषय अब भी शोध का है, इसलिए परीक्षा में आधार को "प्राचीन ज्वालामुखीय संरचना" कहना सुरक्षित है।
जीवन, अर्थव्यवस्था और खतरे
यहाँ नारियल मुख्य फसल है, और मछली पकड़ना, खासकर टूना, आय का बड़ा स्रोत है। भाषा मुख्यतः मलयालम है, जबकि मिनिकॉय में महल बोली जाती है। आबादी बड़ी संख्या में मुस्लिम है और संस्कृति पर केरल व अरब व्यापार का प्रभाव दिखता है।
- द्वीप समुद्र तल से बहुत कम ऊँचाई पर हैं, इसलिए समुद्र स्तर बढ़ने का ख़तरा है
- कोरल ब्लीचिंग (गर्म पानी के कारण कोरल का रंग उड़ना) बड़ी समस्या है
- तटीय कटाव से भूमि घट सकती है
- ताज़े पानी की उपलब्धता सीमित है, इसलिए वर्षा जल और भूजल का संरक्षण ज़रूरी है
अंडमान और लक्षद्वीप में तुलना
| बिंदु | अंडमान-निकोबार | लक्षद्वीप |
|---|---|---|
| समुद्र | बंगाल की खाड़ी/अंडमान सागर | अरब सागर |
| उत्पत्ति | प्लेट सबडक्शन से उठी पर्वतमाला | कोरल एटोल |
| भू-आकृति | पहाड़ी, घने वन | समतल, रेतीले |
| सक्रिय ज्वालामुखी | बैरन द्वीप | नहीं |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लक्षद्वीप किससे बना है?
मूंगा (कोरल) जीवों के कंकाल से बने एटोल।
एटोल क्या है?
कोरल से बना छल्लेनुमा द्वीप जिसके बीच लैगून होता है।
लक्षद्वीप की राजधानी?
कवरत्ती।
एटोल किसे कहते हैं?
कोरल से बना छल्लेनुमा द्वीप जिसके बीच लैगून होता है।
मिनिकॉय किस चैनल से अलग है?
नाइन डिग्री चैनल से मिनिकॉय शेष लक्षद्वीप से अलग है।
लक्षद्वीप का कुल भूमि क्षेत्र कितना है?
लगभग 32 वर्ग किलोमीटर।
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