कार्बोहाइड्रेट का पाचन कैसे होता हैं -carbohydrate digestion in hindi

आप एक शब्द बहुत बार सुने होंगे कार्बोहाइड्रेट… कोई भी आप पैकेट वाला फूड खरीदेंगे, तो उसके पीछे आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, fats वगैरह चीज़े तो लिखी हुई मिलती है। कि इन चीजों में इतना मात्रा में कार्बोहाइड्रेट है। क्या आप यह कभी जान पाए हैं कि यह कार्बोहाइड्रेट असल में होता क्या है??? देखिये ऊपर ऊपर किसी चीज को जानना और असल में चीज को समझ लेना, इनमे बहुत अंतर है। अगर आप यह समझ जाओगे तो आप कभी भी कंफ्यूज नहीं हो पाओगे और अपनी हेल्थ को खुद ही मेंटेन करने में सक्षम हो पाओगे। बिना किसी डॉक्टर के जरूरत के, बस यह जानकर कि आखिर कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन lipids होते क्या है?? चलिए हम भी जानते हैं कि कार्बोहाइड्रेट आखिर होते क्या है???

देखिए सबसे पहले तो आपको यह बता दें कि कार्बोहाइड्रेट और sacchrides एक ही चीज होते हैं. अगर आगे आपको saccharide शब्द सुनने को मिलेगा, तो आप कंफ्यूज मत हो जाएगा। आपको बता दे कि sacchride एक ग्रीक वर्ड है, जिसका मतलब होता है शुगर यानी चीनी होता है।

कार्बोहाइड्रेट क्या होता है –

कार्बोहाइड्रेट असल में कार्बन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के संयोग से बने हुए बायो मॉलिक्यूल है। जो हमारे शरीर में एनर्जी को स्टोर करते हैं। साथ ही साथ हमारे प्रत्येक कार्य करने के लिए जो हमें एनर्जी मिलती है, वह सभी इसी कार्बोहाइड्रेट से मिलता है। यह प्रोटीन को spare करने में मदद करता है। डीएनए और आरएनए जैसी चीज को बनाने में मदद करता है, और भी बहुत सारे वाइटल फंक्शन है इसके। देखिए इसमें जो कार्बन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात है वह हमेशा 1:2:1 के अनुपात में ही होता है.

कार्बोहाइड्रेट के प्रकार

देखिए यह जो कार्बोहाइड्रेट होता है असल में इसे 4 भागों में भी विभाजित कर दिया गया है।

एक होता है monosacchride, जिसमें शुगर का केवल एक मॉलिक्यूल होता हैं, यह कार्बोहाइड्रेट का सबसे सिंपलेस्ट फॉर्म होता है। इसके उदाहरण  है ग्लूकोज गैलेक्टोज फ्रुक्टोज जैसे कार्बोहाइड्रेट… ग्लूकोज हमें चीनी वगैरह से मिल जाता है, फ्रुक्टोज हमें फलों से मिलता है, और galactose हमें सब्जियों आदि चीजों में मिलता है।

दूसरा होता है disacchride जिसमें शुगर के दो मॉलिक्यूल आपस में ग्लाइकोसिडिक बॉन्ड से बंधे हुए होते हैं। इसके उदाहरण है सुक्रोज जो कि एक ग्लूकोस और एक fructose मॉलिक्यूल के बंध से बना हुआ होता है। दूसरा उदाहरण है माल्टोज जो कि ग्लूकोस के दो मॉलिक्यूल से मिलकर बना हुआ होता है। और तीसरा उदाहरण है लेक्टोज जोकि एक ग्लूकोस और एक गैलेक्टोज molecule से मिलकर बना हुआ होता है।

तीसरा होता है oligosaccharides जिसमें शुगर के 3 से 9 मॉलिक्यूल आपस में जुड़े रहते हैं. Example raffinose and stachyose

और चौथा होता है polysaccharides जिसमें शुगर के यानी carbohydrates के 10 से ज्यादा molecules आपस में जुड़े रहते हैं, यह कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट होता है, example starch और cellulose, starch वो जो आलू वगैरह में पाया जाता है और cellulose वो जो पत्तों में पाया जाता है, सैलूलोज हम मनुष्य पचा नहीं पाते हैं।

कार्बोहाइड्रेट का पाचन

अब देखिए कार्बोहाइड्रेट के बारे में इतना जानना पर्याप्त है। इस वीडियो में हमें यह जानना है कि आखिर यह कार्बोहाइड्रेट का पाचन होता कैसे है। सबसे पहले तो आपको यह बता दे कि कोई भी भोजन जो हम खाते हैं, पेट में जाते ही वह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है, और वह जो बायो मॉलिक्यूल बनते हैं, वह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन lipids जिसमें fats वगैरह होते हैं, मिनरल्स और विटामिन के रूप में ही बन जाते हैं। यह कहिए उनके छोटे-छोटे monomers में टूट जाते हैं और उन्हीं का पाचन होता है। और यही मॉलिक्यूल हमारे ब्लड में अब्सॉर्ब होते हैं। इसीलिए हमें यह जानना कि कार्बोहाइड्रेट का पाचन होता कैसे है??? यह जानना हमारे लिए बहुत जरूरी है।

देखिए सबसे पहले जब भी हम कोई फूड खाते हैं, तो हमारे फूड में हमारा सलाइवा भी मिल जाता है। हमारे ओरल कैविटी में कुल 3 मुख्य सलाइवेरी ग्लैंड पाए जाते हैं, एक यह parotid gland, यह है सबमंडीबुलर ग्लैंड और यह सबलिंगुअल ग्लैंड… जिसमें से बहुत सारा सलाइवा निकलता है और जब हम भोजन को चबाते हैं, तो यही सलाइवा हमारे भोजन मिल जाता है। देखिए होता यह है कि इस saliva में एक बहुत ही महत्वपूर्ण एंजाइम पाया जाता है। salivary amylase, सलाइवेरी एमीलेस क्या करता है, हमारे फूड में जो कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट है, जैसे मैने बताया starch वगैरा उन सभी का ब्रेकडाउन यह सलाइवेरी एमीलेस सिंपल फॉर्म में कर देता है।

प्रोटीन का पाचन कैसे होता हैं – protein digestion hindi

यानी कि इसे तोड़कर मेन्ली disacchired में तोड़ देता है। जैसे माल्टोज सुक्रोज या lactose जैसे कार्बोहाइड्रेट में। पर यह सलाइवेरी एमीलेस भी पूरी तरीके से इन कार्बोहाइड्रेट का ब्रेकडाउन नहीं कर पाता है। क्योंकि हमारे मुंह में भोजन बहुत ही कम समय के लिए रहता है, इसीलिए जब हम भोजन निगलते हैं, तो लगभग 30 से 50 परसेंट कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़कर छोटे-छोटे फॉर्म में कर देता है। बाकी का जो बचा हुआ कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट होता है, वह सीधे हमारे पेट में चला जाता है, जब हम उसे निगल लेते हैं।

जो कार्बोहाइड्रेट हम अपने पेट में निगल लेते हैं, जिसमे saliva भी मिला रहता है, दरअसल हमारे पेट में पहुंचते ही एसिड के संपर्क में आते ही यह सलाइवेरी एमीलेस भी अब निष्क्रिय हो जाता है। और पेट में कार्बोहाइड्रेट का असल में कुछ भी नहीं होता है, यह साधारणतया सीधे ही हमारे छोटी आत के पहले भाग duodenum में पास हो जाता है।

छोटी आंत में कार्बोहाइड्रेट का पाचन

अब देखिए duodenum में जैसे ही यह भोजन पहुंचता है, जिसमें हमारा कार्बोहाइड्रेट भी होता है, और जो saliva के मिलने पर थोड़ा बहुत ब्रेकडाउन हो चुका था, अब उसी duodenum में अब पैंक्रियास से पेनक्रिएटिक जूस आता है, जिसमें हमारे सलाइवा से ज्यादा स्ट्रांग amylase होता है, जो इस कार्बोहाइड्रेट को फरदर और छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है, यानी disacchride और monosacchride में तोड़ देता है। यह इस amylase कहते हैं पेनक्रिएटिक amylase

अब देखिए पैंक्रियास में आने वाला pancreatic amylase इतना स्ट्रांग होता है कि यह हमारे duodenum में आने वाले कार्बोहाइड्रेट को बिल्कुल छोटे-छोटे disacchrides में तोड़ देता है, जैसे सुक्रोज माल्टोज और lactose जैसे  sacchrides में, इस बार जो कार्बोहाइड्रेट का ब्रेकडाउन होता है, वह कंप्लीट breakdown होता है। लेकिन अभी भी हमारा शरीर यानी हमारा छोटी आत की दीवारें इस disacchrides को अवशोषित करने में सक्षम नहीं होती हैं। हमारी स्मॉल इंटेस्टाइन के दीवार पर मौजूद villies केवल और केवल monosachhride जो कि सबसे सिंपल फॉर्म होता है, कार्बोहाइड्रेट का केवल उन्हें ही absorb कर पाती है।

अब देखिए हमारे स्मॉल इंटेस्टाइन के इनर लाइनिंग पर मैंने आपको बताया था कि कुछ छोटी-छोटी villies होती है, जब हम इन villies को भी zoom करके देखेंगे तो हम पाते हैं कि इन villies के ऊपर भी कुछ माइक्रो villies होती हैं। देखिये ये जो microvillies होती है, इन्हें ब्रश बॉर्डर भी कहा जाता है। और इन्हीं ब्रश बॉर्डर से हमारे lumen में कुछ enzyme निकलते हैं। पहला enzyme जो निकलता है, वह होता है, maltase जो कि माल्टोज को दो ग्लूकोज में तोड़ देता है। दूसरा enzyme जो निकलता है, वो है sucrase, जो सुक्रोज को एक glucose और एक fructose में तोड़ देता है। तीसरा enzyme निकलता है, वो है lactase जो lactose को एक ग्लूकोज और एक galactose में तोड़ देता है। और जैसे ही यह disacchrides monosacchride में टूटा, ग्लूकोस गैलेक्टोज और फ्रुक्टोज़ जैसे सिंपल फॉर्म में।

कार्बोहाइड्रेट का अवशोषण

देखी जैसे ही यह सिंपल फॉर्म में आया. यह कार्बोहाइड्रेट… ये हमारे इसी विली पर ही मौजूद  absorptive cell जिसे enterocyte भी कहते हैं। इसी पर मौजूद होता है एक प्रोटीन चैनल जिसे कहते हैं glut 5, इस ट्रांसपोर्टर की मदद से fructose हमारे छोटी आंत से इस absorptive cell के अंदर आ जाता है। ठीक इसी तरह एक और प्रोटीन चैनल होता है, absoptive cell के ऊपर जो होता है, सोडियम ग्लूकोस लिंक ट्रांसपोर्टर… जिसकी मदद से ग्लूकोज और गैलेक्टोज इस absoptive cell के अंदर आ जाते हैं और जब यह तीनों ही सिंपल form के कार्बोहाइड्रेट्स enterocyte के अंदर आते हैं, तो glut2 नाम का एक ट्रांसपोर्टर, इस सभी सिंपलर कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज और गैलेक्टोज को हमारे ब्लड में डिफ्यूज कर देता है, यानी मिला देता है।

उसके बाद ब्लड में मिलने के बाद ये ग्लूकोस गैलेक्टोज और fructose हमारे लिवर में जाते हैं, जहां लिवर क्या करता है, फ्रुक्टोज को ट्राइग्लिसराइड में कन्वर्ट करके, शरीर में ही स्टोर कर देता है। गैलेक्टोज को ग्लूकोस में कन्वर्ट कर देता है और जो ग्लूकोस शरीर के काम नहीं आने वाला है, उसे ग्लाइकोजन में स्टोर कर देता है। जिससे कभी भी फरदर शरीर में ग्लूकोस की जरूरत हो तो, यही ग्लाइकोजन ग्लूकोस में कन्वर्ट होकर हमें एनर्जी प्रोवाइड करवाता है।

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